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भारत के गेंदबाजी कोच मोर्ने मोर्कल ने पिच क्यूरेटर की मेहनत को सराहा

मुंबई के वानखेड़े और यहां के मोटेरा स्टेडियम में बल्लेबाजी के लिए थोड़ी मुश्किज पिचें चर्चा का विषय है लेकिन भारत के गेंदबाजी कोच मोर्ने मोर्कल ने क्यूरेटर (पिच का प्रबंधन करने वाले) के प्रति सहानुभूति जताते हुए कहा कि उन्होंने अपनी क्षमता के अनुसार सर्वोत्तम पिचें उपलब्ध कराई हैं।

मुंबई और अहमदाबाद में भारतीय बल्लेबाजों को रनगति बढ़ाने में संघर्ष करना पड़ा। एक पिच में नमी मौजूद थी, जबकि दूसरी पिच पर गेंद थोड़ी रूक कर आ रही थी। इससे बल्लेबाजों के लिए स्ट्रोक खेलना आसान नहीं था।

मोर्केल ने एक न्यूज़ एजेंसी के सवाल पर कहा, “सत्र के आखिरी समय में 200 से अधिक रन वाली पिच तैयार करना क्यूरेटर के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। उन्हें इसका श्रेय मिलना चाहिए।” इन पिचों पर आक्रामक बल्लेबाजी करने वाले तिलक वर्मा को शुरुआती मैचों में लय पकड़ने में कठिनाई हुई, जबकि सूर्यकुमार यादव ने भी शुरुआत में समय लिया।

भारत के सुपर-आठ मुकाबले में दक्षिण अफ्रीका से भिड़ंत से पहले मोर्केल ने कहा, “दर्शकों की अपेक्षाएं रहती हैं कि मुकाबले बड़े स्कोर वाले हों। ऐसे में क्यूरेटरों पर काफी दबाव होता है। वे हमें सर्वश्रेष्ठ संभव पिच देने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं।” मोर्केल के अनुसार आदर्श पिच का पूर्वानुमान लगाना बेहद मुश्किल है।

© AFP

उन्होंने कहा, “आज भी यह तय करना कठिन है कि पिच किस तरह खेलेगी। हम अनुमान लगाते हैं (नमी है, सूखी दिख रही है, गेंद रुक सकती है या स्कीड कर सकती है) लेकिन सही भविष्यवाणी करना आसान नहीं।

इसलिए ऐसे खिलाड़ियों का होना जरूरी है, जो परिस्थितियों को जल्दी समझ सकें।” घरेलू सत्र के दौरान अधिक उपयोग के कारण पिचों के बल्लेबाजी के लिए मुश्किल होने के सवाल पर मोर्केल ने सीधा जवाब नहीं दिया। उन्होंने कहा, “अब तक इस टूर्नामेंट में हमने बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों में हालात के मुताबिक अच्छा तालमेल बिठाया है।

पहले मैच को छोड़ दें तो बाकी मुकाबलों में सीखने का अवसर मिला है। पहला मैच 200 से अधिक रन वाली पिच नहीं थी, शायद 170 रन के आसपास की सतह थी, और हमने शुरुआत में जरूरत से ज्यादा आक्रामक रुख अपनाया। लेकिन हर मैच से सीख मिलती है, यही इस खेल की खूबसूरती है।”

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