निवेश, नवाचार और नौकरियों का नया विजन: मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने रखा विकसित मध्यप्रदेश@2047 का रोडमैप

भोपाल : प्रदेश में बड़े पैमाने पर निवेश लाकर नई तकनीकों के माध्यम से युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित करना राज्य सरकार का प्रमुख लक्ष्य है। इसी संकल्प के साथ मध्यप्रदेश को आगामी 25 वर्षों में एक मजबूत और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित करने की दिशा में योजनाबद्ध तरीके से काम किया जा रहा है। यह बात मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने सोमवार को कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर में आयोजित ‘अभ्युदय इंडस्ट्री लीडरशिप कॉन्क्लेव 2026’ में कही। राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका ऑर्गेनाइजर द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने संपादक प्रफुल्ल केतकर के साथ संवाद करते हुए ‘विकसित मध्यप्रदेश’ के विजन पर विस्तार से चर्चा की।
1 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी और आय बढ़ाने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश तेजी से प्रगति कर रहा है और इस दिशा में मध्यप्रदेश की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने प्रदेश को 01 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य तय किया है, जिसके लिए सभी क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए आगामी 25 वर्षों का विस्तृत दृष्टिपत्र तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की वर्तमान प्रति व्यक्ति आय लगभग 01 लाख 55 हजार रुपये है, जिसे अगले 25 वर्षों में बढ़ाकर 22 लाख 50 हजार रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
एमएसएमई से औद्योगिक विकास को मिलेगी गति
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश कृषि के क्षेत्र में लंबे समय से अग्रणी रहा है, लेकिन औद्योगिक विकास के लिए एमएसएमई सेक्टर राज्य की रीढ़ है। राज्य सरकार सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए लगातार नई योजनाएं लागू कर रही है, ताकि छोटे शहरों और कस्बों तक औद्योगिक विकास पहुंचे और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ें। उन्होंने बताया कि प्रदेश में लागू की गई 18 नई औद्योगिक नीतियों के माध्यम से निवेशकों को आकर्षित करने का प्रयास किया जा रहा है।
क्षेत्रीय कॉन्क्लेव से छोटे शहरों में उद्योग विस्तार
डॉ यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने संभागीय स्तर पर विभिन्न सेक्टर आधारित रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव आयोजित किए हैं, जिससे उद्योगों का विस्तार बड़े शहरों के साथ छोटे शहरों तक भी हो सके। माइनिंग, टेक्सटाइल, टूरिज्म और इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट जैसे क्षेत्रों में निवेश की अपार संभावनाएं हैं। कटनी और शहडोल में माइनिंग सेक्टर में निवेश के लिए देश के बड़े उद्योगपति आगे आए हैं, वहीं नर्मदापुरम के बाबई-मोहासा क्षेत्र में इलेक्ट्रिकल उपकरण निर्माण के लिए औद्योगिक क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहा है।
युवाओं को रोजगार देने वाला बनाने की पहल
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य युवाओं को नौकरी खोजने वाला नहीं बल्कि रोजगार देने वाला बनाना है। इसके लिए स्वरोजगार योजनाओं और युवा उद्यमिता को विशेष रूप से प्रोत्साहित किया जा रहा है। धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ होम-स्टे जैसी पहल ने ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा किए हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि इन प्रयासों का ही परिणाम है कि प्रदेश में बेरोजगारी दर तेजी से घटकर मात्र 1 से 1.5 प्रतिशत के आसपास रह गई है। रोजगार आधारित उद्योगों की स्थापना पर निवेशकों को विशेष अनुदान भी दिया जा रहा है।
किसानों की आय बढ़ाने पर विशेष ध्यान
कृषि क्षेत्र को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार किसानों की समृद्धि के लिए ‘कृषक कल्याण वर्ष’ के तहत विशेष योजनाएं लागू कर रही है। कृषि उत्पादन के साथ-साथ फूड प्रोसेसिंग और पशुपालन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। दूध उत्पादन को 9 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। सिंचाई सुविधाओं के विस्तार पर भी जोर दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले डेढ़ साल में ही 7.5 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई का दायरा बढ़ा है और इसे 100 लाख हेक्टेयर तक पहुंचाने की योजना है।
नवीकरणीय ऊर्जा में प्रदेश की मजबूत बढ़त
नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भी मध्यप्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य देश में नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन के मामले में तीसरे स्थान पर पहुंच चुका है। उत्तर प्रदेश के साथ मिलकर मुरैना में सोलर एनर्जी का बड़ा प्रोजेक्ट स्थापित किया जा रहा है, जिससे दोनों राज्य छह-छह महीने बिजली का उपयोग करेंगे। किसानों को सोलर पंप देकर बिजली के मामले में आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। मंदसौर के गांधी सागर बांध में पंप स्टोरेज परियोजना भी कम समय में पूरी की गई है।
बजट, शहरीकरण और औद्योगिकीकरण पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार का आगामी बजट भी विकास को नई गति देगा। राज्य का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में बजट को दोगुना करना है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के विकास के लिए शहरीकरण और औद्योगिकीकरण दोनों जरूरी हैं। इंदौर और भोपाल में मेट्रोपोलिटन एरिया विकसित किए जा रहे हैं, जिससे निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। सरकार का मानना है कि जहां उद्योग स्थापित होंगे, वहीं शहरों का भी तेजी से विकास होगा।
नक्सलवाद से मुक्ति एक बड़ी उपलब्धि
एक महत्वपूर्ण उपलब्धि का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश 31 मार्च की तय समय-सीमा से पहले नक्सलवाद से मुक्त होने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। इस सफलता में हॉक फोर्स और पुलिस के जवानों की अहम भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि अब प्रदेश में दोबारा नक्सलवाद न पनपे, इसके लिए प्रभावित क्षेत्रों में विकास योजनाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
कौशल विकास और तकनीकी शिक्षा पर फोकस
युवाओं के कौशल विकास पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि औद्योगिक गतिविधियों के बढ़ने के साथ भविष्य में बड़ी संख्या में कुशल कामगारों की आवश्यकता होगी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत युवाओं के कौशल उन्नयन के लिए विशेष प्रबंध किए जा रहे हैं। इंजीनियरिंग कॉलेजों में आईटी सेंटर खोले जा रहे हैं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी नई तकनीकों के सकारात्मक उपयोग के लिए छात्रों को तैयार किया जा रहा है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में यह भी दोहराया कि विकसित भारत@2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में मध्यप्रदेश की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी और राज्य सरकार निवेश, नवाचार और रोजगार के नए अवसरों के माध्यम से इस दिशा में निरंतर आगे बढ़ रही है।
कार्यक्रम में उद्योग जगत की सहभागिता
कार्यक्रम में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य काश्यप भी उपस्थित थे। भारत प्रकाशन के प्रबंध निदेशक अरुण कुमार गोयल ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया। इसके साथ ही उक्त कार्यक्रम में प्रदेश के अनेक उद्योगपति एवं गणमान्य नागरिक एवं वरिष्ठ पत्रकार जन मौजूद रहे।



