उत्तर प्रदेश को टीबी मुक्त बनाने की दिशा में तेज हुए कदम

राघवेंद्र प्रताप सिंह: उत्तर प्रदेश को टीबी मुक्त बनाने के उद्देश्य से योगी सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है। टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत प्रदेश के सभी शहरी क्षेत्रों में होटल, रेस्टोरेंट और हास्पिटैलिटी सेक्टर में कार्यरत कर्मचारियों की नियमित टीबी जांच को अनिवार्य कर दिया गया है। अभियान को लेकर आयोजित बैठक में यह फैसला लिया गया। इसके साथ ही सरकारी एवं निजी मेडिकल कॉलेजों के छात्रों तथा जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत रसोई कर्मचारियों की भी अनिवार्य टीबी जांच कराने पर सहमति बनी।
प्रदेश सरकार का मानना है कि इससे संक्रमण के जोखिम को प्रारंभिक स्तर पर ही नियंत्रित किया जा सकेगा। बैठक में अपर मुख्य सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अमित कुमार घोष ने राज्य और जिला टीबी फोरम की हर महीने बैठक आयोजित करने और जिला टीबी फोरम की रिपोर्ट अनिवार्य रूप से पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश दिए।
सचिवालय में आयोजित बैठक में अपर मुख्य सचिव ने कहा कि टीबी उन्मूलन का लक्ष्य तभी हासिल किया जा सकता है, जब सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि टीबी उन्मूलन केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। उन्होंने निर्देश दिए कि संभावित टीबी रोगियों की समयबद्ध जांच सुनिश्चित की जाए और चिह्नित मरीजों को बिना किसी देरी के गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराया जाए। साथ ही समाज में जागरूकता बढ़ाने के लिए टीबी चैंपियंस की भागीदारी को मजबूत करने और टीबी उन्मूलन कार्यक्रमों के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए इंटरनेट मीडिया व अन्य संचार माध्यमों के प्रभावी उपयोग पर भी जोर दिया गया।
संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्यों के अनुसार सभी देशों ने वर्ष 2030 तक टीबी उन्मूलन का लक्ष्य तय किया है, लेकिन भारत सरकार ने वर्ष 2025 तक टीबी उन्मूलन का लक्ष्य रखा है। अभी राष्ट्रीय स्तर पर इस लक्ष्य अवधि को बढ़ाने की जरूरत है और तेज कार्यवाही के साथ समय पर लक्ष्य को पूरा करा लेने की जरूरत है।



