आठ साल, आठ महापरिवर्तन

लखनऊ: वर्ष 2017 से पहले बीमारू प्रदेश कहे जाने वाला उत्तर प्रदेश पिछले आठ वर्षों में स्वस्थ्य और उत्तम प्रदेश बनकर उभरा है। यह सब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दूरदर्शी सोच और हर प्रदेशवासी को सस्ता और गुणवत्तापूर्ण इलाज उपलब्ध कराने के दृढ़ संकल्प से साकार हो पाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का तेजी से विस्तार हुआ है। योगी सरकार ने पिछले आठ वर्षों में प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या में वृद्धि, एमबीबीएस-पीजी सीटों में विस्तार, सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों और रिसर्च संस्थानों की स्थापना तथा आयुष चिकित्सा को बढ़ावा देकर चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में एक नया स्वर्णिम अध्याय लिखा है। इन प्रयासों से प्रदेश के लाखों युवाओं को बेहतर चिकित्सा शिक्षा और प्रशिक्षण का अवसर मिल रहा है, जिससे भविष्य में प्रदेश के स्वास्थ्य ढांचे को और मजबूत किया जा सकेगा।
याेगी सरकार के पिछले आठ वर्षों के कार्यकल में प्रदेश में हेल्थ सेक्टर के इंफ्रास्ट्रक्चर से लेकर वर्क फोर्स समेत अन्य सुविधाओं में काफी इजाफा हुआ है। साथ ही वर्तमान में प्रदेशवासियों को सुगम, सस्ता और गुणवत्तापूर्ण इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है। सीएम योगी की मॉनीटरिंग का ही नतीजा है उत्तर प्रदेश, जो वर्ष 2017 से पहले ‘बीमारू प्रदेश’ के नाम से जाना जाता था, आज स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू रहा है। वर्ष 2017 में सत्ता संभालने के बाद से, योगी सरकार ने प्रदेश के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के लिए कई ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। इन्हीं प्रयासों का नतीजा है कि प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं का अभूतपूर्व विस्तार हुआ है।
मेडिकल कॉलेज और एमबीबीएस संग पीजी सीटों में हुए इजाफा
पिछले आठ वर्षों में प्रदेश में 80 मेडिकल कॉलेज संचालित किए गए हैं, जिनमें 44 राजकीय एवं 36 निजी मेडिकल कॉलेज शामिल हैं। यह उपलब्धि प्रदेश के स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में मील का पत्थर साबित हो रही हैं। प्रदेश सरकार की दूरदर्शिता का ही परिणाम है कि बिजनौर, बुलंदशहर, कुशीनगर, पीलीभीत, सुल्तानपुर, कानपुर देहात, ललितपुर, औरैया, चंदौली, गोंडा, सोनभद्र, लखीमपुर खीरी और कौशांबी जैसे जिलों में स्वशासी मेडिकल कॉलेजों में पठन-पाठन प्रारंभ हो चुका है। वहीं, महाराजगंज, शामली और संभल में पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल के तहत मेडिकल कॉलेजों की स्थापना कर चिकित्सा शिक्षा को और अधिक सुलभ बनाया गया है। वहीं प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा को मजबूती देने के लिए एमबीबीएस और पीजी सीटों में भी ऐतिहासिक वृद्धि की गई है। वर्तमान में सरकारी क्षेत्र में 5,250 एमबीबीएस सीटें उपलब्ध हैं, जबकि निजी क्षेत्र में 6,550 सीटें हैं। इसके अतिरिक्त पीपीपी मॉडल पर स्थापित तीन नए मेडिकल कॉलेजों में 350 अतिरिक्त सीटें जोड़ी गई हैं। इसी तरह, सरकारी क्षेत्र में एमडी/एमएस/डिप्लोमा सीटों की संख्या 900 से बढ़कर 1,871 हो गई है, जबकि निजी क्षेत्र में 2,100 पीजी सीटें उपलब्ध हैं। सुपर स्पेशियलिटी पाठ्यक्रमों में भी 250 सीटें जोड़ी गई हैं, जिससे प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा को …



