राष्ट्रमंडल खेलों में भारत की पदक उम्मीदों का भार स्टार खिलाड़ियों के कंधों पर
भारत के लिये पिछले दो दशक से राष्ट्रमंडल खेलों में शीर्ष पांच में रहने का सिलसिला कायम रखना इस बार स्पर्धाओं में कटौती की वजह से मुश्किल हो सकता है लेकिन मुक्केबाजी, भारोत्तोलन और एथलेटिक्स में अच्छे पदक आने की उम्मीदें है।
पिछले तीन दशक में यह सबसे छोटे राष्ट्रमंडल खेल हैं जिनमें लागत में कटौती की वजह से चार स्थानों पर सिर्फ दस खेलों की स्पर्धायें होंगी और 74 देशों के करीब 3000 खिलाड़ी जोर आजमाइश करेंगे। ओवो हाइड्रो पर बृहस्पतिवार को उद्घाटन समारोह के जरिये इन खेलों की औपचारिक शुरूआत होगी।
इनमें से छह खेलों में पैरा खेलों की स्पर्धायें भी साथ में होंगी। आस्ट्रेलिया के विक्टोरिया प्रांत को इन खेलों की मेजबानी मिली थी लेकिन बढती लागत के कारण उसने हाथ खींच लिया। राष्ट्रमंडल खेलों का भविष्य ही खतरे में पड़ते देख ग्लास्गो ने मेजबानी के लिये हामी भरी।

पहले भी 2014 में मेजबान रह चुके स्कॉटलैंड के इस शहर ने करीब 160 मिलियन पाउंड के बजट में इन खेलों का आयोजन किया है जो बर्मिंघम में 2022 में हुए राष्ट्रमंडल खेलों से 60 प्रतिशत कम है। ग्लास्गो के सामने चुनौती यह साबित करने की है कि कम बजट में भी खेल हो सकते हैं जबकि खेलों में कटौती ने भारत की राह मुश्किल कर दी है।
भारत मैनचेस्टर में 2002 राष्ट्रमंडल खेलों के बाद से हर बार शीर्ष पांच में रहा है। इस बार हॉकी, कुश्ती, बैडमिंटन, टेबल टेनिस और निशानेबाजी के नहीं होने से यह कर पाना मुश्किल लग रहा है। बर्मिघम में इन्हीं खेलों में भारत के 61 में से लगभग आधे पदक आये थे। ऐसे में अब एथलेटिक्स, मुक्केबाजी और भारोत्तोलन पर जिम्मेदार आन पड़ी है।
भारत ने एथलेटिक्स में 32 सदस्यीय दल उतारा है जो 22 पदक स्पर्धाओं में भाग लेगा। इसकी अगुवाई दो बार के ओलंपिक पदक विजेता नीरज चोपड़ा करेंगे। वह इस बार पदक के प्रबल दावेदार के रूप में नहीं बल्कि चैलेंजर के रूप में उतरेंगे।
श्रीलंका के रूमेश थरंगा पुरूषों के भालाफेंक में प्रबल दावेदार हैं जिन्होंने पिछले महीने रोम डायमंड लीग में 92 . 62 मीटर का थ्रो फेंककर सनसनी फैला दी थी। पेरिस ओलंपिक चैम्पियन पाकिस्तान के अरशद नदीम भी दौड़ में हैं लेकिन चोपड़ा भी दावेदारों में से है।
भारत को ऊंची कूद में सर्वेश कुशारे, लंबी कूद में मुरली श्रीशंकर, त्रिकूद में प्रवीण चित्रावेल और महिला तथा पुरूष चार गुणा 400 मीटर रिले टीमों से भी पदक की उम्मीद है। भारत ने बर्मिंघम में एथलेटिक्स में आठ पदक जीते थे।
भारोत्तोलन में नजरें ओलंपिक रजत पदक विजेता मीराबाई चानू पर लगी होंगी। मणिपुर की 31 वर्ष की चानू पिछले दो राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीत चुकी है। भारोत्तोलन में भारत के 11 खिलाड़ी ही भाग लेंगे क्योंकि राष्ट्रीय शिविर में कई खिलाड़ी डोप टेस्ट में नाकाम हुए हैं जिससे भारत की पदक की उम्मीदें कम हो गई हैं।
मुक्केबाजी में तोक्यो ओलंपिक कांस्य पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन (75 किलो) राष्ट्रमंडल खेलों में पहला पदक जीतना चाहेंगी। वहीं 57 किलो में विश्व चैम्पियन जैसमीन लंबोरिया बर्मिंघम में जीते कांसे को स्वर्ण में बदलने को उत्सुक होंगी। एशियाई चैम्पियन प्रीति पवार (54 किलो), साक्षी चौधरी (51 किलो) और अरूंधति चौधरी (70 किलो) भी दावेदारों में हैं।
पुरूष वर्ग में नरेंदर बेरवाल (प्लस 90 किलो) और विश्व कप पदक विजेता सचिन सिवाच (60 किलो) से उम्मीदें हैं। लॉन बॉल में भारत ने बर्मिंघम में महिला वर्ग में स्वर्ण और पुरूष वर्ग में रजत पदक जीते थे और इस बार भी उसे दोहराना चाहेंगे।
जूडो में पिछले खेलों में तीन पदक मिले थे जिसे बेहतर करने का लक्ष्य होगा। पैरा एथलीटों से भी अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है। इस बार छह खेलों में पैरा स्पर्धायें भी साथ में हो रही है।



