हल्द्वानी में खुली उत्तराखंड की पहली GI टैग गैलरी: एक ही छत के नीचे दिखेगी देवभूमि की संस्कृति

देहरादून ( विवेक ओझा) : बौद्धिक संपदा संरक्षण और उससे जुड़ी जागरूकता को बढ़ाने के लिए उत्तराखंड की धामी सरकार ने कदम उठाए हैं। उत्तराखंड की समृद्ध संस्कृति, पारंपरिक हस्तशिल्प और कृषि उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए हल्द्वानी में राज्य की पहली भौगोलिक संकेतक (GI) गैलरी की शुरुआत की गई है। इस खास गैलरी को हल्द्वानी स्थित उत्तराखंड वन प्रशिक्षण अकादमी (FTA) में तैयार किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य अकादमी में आने वाले प्रशिक्षुओं, आम जनता और वीआईपी मेहमानों को उत्तराखंड की अनूठी विरासत से रूबरू कराना और उनके प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
इस गैलरी को तैयार करने में करीब 3 महीने का समय लगा। वन विभाग की टीम ने राज्य के सुदूर सीमांत क्षेत्रों से इन खास उत्पादों को इकट्ठा किया। टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती नाशवान (जल्दी खराब होने वाले) उत्पादों जैसे बेदू, रामनगर की लीची और रामगढ़ के आडू को लंबे समय तक सुरक्षित रखने की थी, जिसे वैज्ञानिक तरीकों से संरक्षित कर गैलरी में सजाया गया है।
उत्तराखंड के पास हैं 30 से ज्यादा जीआई टैग, बनाया था रिकॉर्ड :
उत्तराखंड के पास वर्तमान में कृषि, हस्तशिल्प, खाद्य और निर्मित वस्तुओं की श्रेणी में 30 से अधिक जीआई टैग उत्पाद मौजूद हैं। बता दें कि दिसंबर 2023 में उत्तराखंड ने एक ही दिन में रिकॉर्ड 18 जीआई टैग हासिल कर देश में इतिहास रचा था।
गैलरी में क्या-क्या है खास?
- पहाड़ी कृषि उत्पाद: मुनस्यारी का सफेद राजमा, तेजपत, कुमाऊं का च्युरा तेल, अल्मोड़ा की लखोरी मिर्च, बेरीनाग चाय और औषधीय गुणों से भरपूर उत्तराखंड का काला भात (काली सोयाबीन)।
- पारंपरिक हस्तशिल्प और कला: कुमाऊं की मशहूर ऐपन कला, यूनेस्को की धरोहर में शामिल चमोली का ‘राममन मुखौटा’, तांबे के सुंदर बर्तन (तामता उत्पाद) और पहाड़ी बांस से बने रिंगल शिल्प के उत्पाद।
- खास आकर्षण: नैनीताल की पारंपरिक मोमबत्तियां और औषधीय गुणों से भरपूर लाल बुरंश का शरबत (रोडोडेंड्रोन स्क्वैश) भी यहां आने वाले लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं।



