यूपी डेटा इकोनॉमी का नया हब: डिजिटल निवेश को गति देने के लिए ‘यूपी नई डेटा नीति’ को योगी कैबिनेट की मंजूरी

राघवेंद्र प्रताप सिंह/लखनऊ: उत्तर प्रदेश को देश का प्रमुख डिजिटल और औद्योगिक फ्रंट-रनर बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा और दूरगामी फैसला लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में लोकभवन में हुई कैबिनेट की महत्वपूर्ण बैठक में ‘उत्तर प्रदेश नई डेटा नीति 2026’ (UP Data Policy) को आधिकारिक मंजूरी दे दी गई है। इस नीति का प्राथमिक उद्देश्य राज्य में बड़े डेटा सेंटर्स (Data Centers) और आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थापना के लिए वैश्विक व घरेलू निवेश को बड़े पैमाने पर आकर्षित करना है।
डेटा सेंटर पार्कों के लिए विशेष रियायतें
- वर्तमान डिजिटल युग में डेटा को सबसे मूल्यवान संसाधन (New Oil) माना जाता है। इसे ध्यान में रखते हुए, नई डेटा नीति के तहत नोएडा और ग्रेटर नोएडा की तर्ज पर अब लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी और कानपुर जैसे प्रमुख शहरों में भी मेगा डेटा सेंटर पार्क स्थापित किए जाएंगे। इन क्षेत्रों में निवेश करने वाली टेक कंपनियों को सरकार कई प्रकार के अभूतपूर्व प्रोत्साहन (Incentives) देगी:
- * स्टाम्प ड्यूटी में 100% की पूर्ण छूट।
- * डेटा सेंटर स्थापित करने के लिए रियायती दरों पर भूमि का आवंटन।
- * बिजली शुल्क में विशेष छूट और निर्बाध (24×7) पावर बैकअप की गारंटी।
डेटा सुरक्षा और नागरिक प्राइवेसी पर सर्वोच्च प्राथमिकता
नीति में आम नागरिकों के व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा और गोपनीयता (Data Privacy) को लेकर कड़े प्रावधान शामिल किए गए हैं। राज्य सरकार के सभी महत्वपूर्ण विभागों का प्रशासनिक डेटा अब एक उच्च-सुरक्षित ‘क्लाउड आर्किटेक्चर’ पर होस्ट किया जाएगा, जिससे भविष्य में होने वाले किसी भी संभावित साइबर हमले (Cyber Attacks) का खतरा न्यूनतम हो सके। इसके अलावा, डेटा शेयरिंग के लिए एक पारदर्शी ढांचा तैयार किया गया है, ताकि जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ सही लाभार्थियों तक बिना किसी बाधा या डेटा लीक के पहुंच सके।
20,000 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित करने का लक्ष्य
कैबिनेट बैठक के बाद जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि सरकार का लक्ष्य इस नीति के माध्यम से अगले पांच वर्षों में 20,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आकर्षित करना है। कंपनियों को प्रशासनिक लालफीताशाही से बचाने के लिए ‘निवेश मित्र’ पोर्टल के माध्यम से सिंगल-विंडो क्लीयरेंस (Single-window Clearance) की सुविधा दी जाएगी, जहां पर्यावरण मंजूरी से लेकर बिजली कनेक्शन तक के सभी कार्य एक निश्चित समय-सीमा के भीतर ऑनलाइन पूरे किए जाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह नीति उत्तर प्रदेश को भारत की डिजिटल इकोनॉमी का एक प्रमुख पावरहाउस बना देगी।



