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वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के लिए वैध रहेगा पासपोर्ट; विदेश मंत्रालय के बयान के बाद चुनाव आयोग ने दूर किया भ्रम

नई दिल्ली (राघवेंद्र प्रताप सिंह) : देश में चल रहे वोटर लिस्ट के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ (SIR) के दौरान मतदाता सूची में नाम शामिल करने के लिए भारतीय पासपोर्ट एक वैध दस्तावेज बना रहेगा। ये कहना है चुनाव आयोग का। विदेश मंत्रालय के हालिया बयान के बाद लोगों में भ्रम का स्थिति बनी हुई थी जिसके बाद चुनाव आयोग ने ये स्पष्टीकरण दिया।

चुनाव आयोग के अधिकारियों के अनुसार वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने या अपनी पात्रता साबित करने के लिए जो 12 मान्य दस्तावेज जरूरी होते हैं, उनमें पासपोर्ट भी शामिल है और इसकी स्थिति में कोई बदलाव नहीं किया गया है। विदेश मंत्रालय ने कहा था कि भारतीय पासपोर्ट “मुख्य रूप से एक यात्रा दस्तावेज” है और इसे नागरिकता का पक्का या निर्णायक सबूत नहीं माना जाना चाहिए।

सरकार ने पासपोर्ट अधिनियम, 1967 की धारा 20 और बॉम्बे हाई कोर्ट के 2013 के एक फैसले का हवाला देते हुए साफ किया कि विशेष परिस्थितियों में जनहित में गैर-नागरिकों को भी पासपोर्ट जारी किया जा सकता है, इसलिए सिर्फ पासपोर्ट होने से भारतीय नागरिकता साबित नहीं होती।

चुनाव आयोग के अधिकारियों ने आश्वस्त किया है कि बिहार और असम में हुए पिछले सुधार अभियानों की तरह ही इस बार भी पासपोर्ट पूरी तरह स्वीकार्य है। इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफ़िसर (ERO) आवेदक की पात्रता तय करने के लिए इन 12 मान्य दस्तावेजों की जांच करते हैं, जिसमें पासपोर्ट पहचान साबित करने का एक मजबूत जरिया बना रहेगा।

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