अफगानिस्तान का सपना टूटा, फ्रांस के लिए बना इंटरनेशनल क्रिकेटर
एक दौर ऐसा भी था जब हशमतुल्लाह शाहिदी को बल्लेबाजी करते या मोहम्मद नबी को अपनी स्पिन गेंदबाजी का जादू बिखेरते देख दाउद अहमदजई मन ही मन मायूस हो जाते थे। वह सोचते थे कि आखिर अफगानिस्तान की क्रिकेट टीम में उनकी जगह क्यों नहीं बन पाई।
अंडर-19 स्तर पर शाहिदी, नबी, गुलबदिन नायब और नजीबुल्लाह जदरान जैसे खिलाड़ियों के साथ क्रिकेट खेल चुके दाउद अक्सर खुद से सवाल करते थे कि क्या उनके भीतर अब भी क्रिकेट बाकी है या नहीं।
अफगानिस्तान के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने का उनका सपना भले ही पूरा न हो सका, लेकिन किस्मत ने उनके लिए एक अलग रास्ता चुना। वह आखिरकार अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर जरूर बने, हालांकि इसके लिए उन्हें अपना देश छोड़कर फ्रांस का रुख करना पड़ा।

इस क्रिकेटर ने एक समाचार एजेंसी से बात करते हुए कहा, ”कई बार टीवी पर उन्हें देखकर मैं रोता था। मैं उनके साथ खेल चुका था। कई बार लगता था कि मेरे सफर को क्या हो गया है और मैं क्या अलग कर सकता था। मैं अफगानिस्तान की जर्सी पहनना चाहता था। ये खिलाड़ी मेरे दोस्त और साथी थे, जिनके साथ मैंने काफी क्रिकेट खेली है, लेकिन जिंदगी मुझे कहीं और ले गई।”
लेग स्पिनर दाउद अहमदजई ने फ्रांस में शरण ली, लेकिन यह सफर उतना आसान भी नहीं था। अफगानिस्तान छोड़ने के बाद उन्हें यूरोप में शून्य से शुरुआत करनी पड़ी। वह क्लब क्रिकेट खेलने के लिए 11 घंटे बस में सफर करके पेरिस से एम्सटर्डम आते थे, क्योंकि ट्रेन टिकट महंगे थे। पौष्टिक और भरपेट खाना मिलना तो कई बार दूभर हो जाता था।
उन्होंने बताया, ”मैच खेलने के लिये 11 घंटे जाना और 11 घंटे लौटने का सफर तय करता था, लेकिन मुझे हमेशा लगता था कि कठिन समय निकल जाएगा। मैंने कभी क्रिकेट छोड़ने के बारे में नहीं सोचा।” हाल ही में वह फ्रांस के लिए 50 से ज्यादा टी20 विकेट लेने वाले पहले अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर बने हैं।
उन्होंने कहा, ”मैं फ्रांस को विश्व कप में देखना चाहता हूं। इटली ने साबित कर दिया कि यूरोपीय टीमें भी यह कर सकती है। उम्मीद है कि फ्रांस भी आगे चलकर विश्व कप खेलेगा।” यूरोपीय टी20 प्रीमियर लीग में एक्सेल युनाइटेड ब्रसेल्स के लिये खेलने जा रहे दाउद को मुख्य कोच मार्क बाउचर के मार्गदर्शन में खेलने का मौका मिलेगा।
उन्होंने इस बारे में कहा, ”आईपीएल ने दिखा दिया कि फ्रेंचाइजी क्रिकेट से क्या हो सकता है। एसए20 ने दक्षिण अफ्रीका में वही किया है। इन टूर्नामेंटों से खिलाड़ियों को सीखने और बेहतर खेलने में मदद मिलती है। ”



