Trending

PoK में पाकिस्तान के ‘चुनावी नाटक’ पर भारत की दो टूक

"कब्जे वाले इलाके में चुनाव अवैध, कश्मीर हमारा अभिन्न अंग"

नई दिल्ली (अभिषेक सिंह): पाकिस्तान जब भी अपने आंतरिक राजनीतिक घमासान और कंगाली से घिरता है, उसका ध्यान भटकाने के लिए वह हमेशा कश्मीर का ही मोहरा चलता है। एक बार फिर पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में तथाकथित विधानसभा चुनाव कराने का शिगूफा छोड़ा गया है। लेकिन नए और आक्रामक भारत ने इस बार पाकिस्तान के इस ‘चुनावी नाटक’ पर बेहद सख्त रुख अपनाया है। भारत सरकार ने दो टूक शब्दों में दुनिया और पाकिस्तान को यह स्पष्ट कर दिया है कि PoK में चुनाव कराने का पाकिस्तान का कोई कानूनी या नैतिक अधिकार नहीं है, क्योंकि यह क्षेत्र पूर्ण रूप से भारत का अभिन्न और अविभाज्य अंग है।

अवैध कब्जे को वैध बनाने की नाकाम कोशिश
अगर हम कूटनीतिक नजरिए से पाकिस्तान की इस चाल का विश्लेषण करें, तो यह साफ है कि पाकिस्तान इन ‘तथाकथित चुनावों’ के जरिए अपने अवैध सैन्य कब्जे को एक लोकतांत्रिक मुखौटा पहनाने की कोशिश कर रहा है। PoK की जनता पिछले कई दशकों से मानवाधिकारों के हनन, महंगाई और पाकिस्तानी सेना के जुल्मों का शिकार है। वहां आए दिन पाकिस्तान सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन होते रहते हैं। ऐसे में यह चुनाव वहां के लोगों को लोकतांत्रिक अधिकार देने के लिए नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान की झूठी छवि चमकाने के लिए एक प्रोपेगेंडा मात्र है।

भारत का स्पष्ट और कड़ा कूटनीतिक प्रहार
भारतीय विदेश मंत्रालय की चेतावनी केवल एक रस्मी बयान नहीं है। यह इस बात का परिचायक है कि भारत अब रक्षात्मक मुद्रा से बाहर आ चुका है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भी यह साफ संदेश दिया है कि पाकिस्तान द्वारा PoK के जनसांख्यिकीय स्वरूप (Demography) को बदलने की कोई भी कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। भारत का यह स्टैंड बिल्कुल क्लियर है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की पूरी रियासत का 1947 में भारत में कानूनी विलय हुआ था, इसलिए पाकिस्तान को इस क्षेत्र को तुरंत खाली करना चाहिए।

बदलते क्षेत्रीय समीकरण
आज जब भारत आर्थिक और सैन्य रूप से एक वैश्विक शक्ति बन चुका है, पाकिस्तान का यह दांव उसी पर भारी पड़ रहा है। PoK के लोग खुद अब भारतीय कश्मीर में हो रहे विकास (जैसे जी-20 की सफल बैठक, नया इंफ्रास्ट्रक्चर) को देख रहे हैं और अपने हालात से उसकी तुलना कर रहे हैं। भारत का यह कड़ा ऐतराज सिर्फ पाकिस्तान के लिए नहीं, बल्कि उन सभी ताकतों के लिए एक स्पष्ट रेड लाइन (Red Line) है, जो कश्मीर के मुद्दे पर भारत की संप्रभुता को चुनौती देने का सपना देखते हैं। यह चुनाव भले ही पाकिस्तान कागजों पर करवा ले, लेकिन इसकी कोई भी अंतरराष्ट्रीय या कानूनी वैधता नहीं होगी।

Related Articles

Back to top button