ट्विशा शर्मा केस: CBI का शिकंजा और कसा, 2 मुख्य संदिग्धों की रिमांड बढ़ी
डिजिटल साक्ष्यों से खुलेंगे बड़े राज

पूरे देश को झकझोर कर रख देने वाले भोपाल के बहुचर्चित ‘ट्विशा शर्मा हत्याकांड’ में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) अत्यंत आक्रामक तरीके से आगे बढ़ रही है। जांच को अपने हाथ में लेते ही 48 घंटे के भीतर गिरफ्तार किए गए 2 मुख्य संदिग्धों की सीबीआई रिमांड को विशेष अदालत ने आगे बढ़ा दिया है। इस बीच, नई दिल्ली से आई केंद्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (CFSL) की टीम डिजिटल साक्ष्यों की सघन जांच कर रही है, जिससे इस हाई-प्रोफाइल मामले में कई सफेदपोश चेहरों के बेनकाब होने की संभावना बढ़ गई है।
ट्विशा शर्मा की रहस्यमय परिस्थितियों में हुई हत्या और उसके बाद मध्य प्रदेश पुलिस की संदेहास्पद और ढीली जांच ने इस मामले को राष्ट्रीय पटल पर ला खड़ा किया था। सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद जब मामला CBI के पास पहुंचा, तो जांच की दिशा पूरी तरह बदल गई।
गिरफ्तार किए गए दोनों संदिग्ध कोई साधारण अपराधी नहीं हैं; सूत्रों के मुताबिक, इनके तार राज्य के कुछ रसूखदार राजनीतिक और व्यापारिक परिवारों से जुड़े हुए हैं। सीबीआई ने अदालत में दलील दी कि इन संदिग्धों ने स्थानीय पुलिस की मदद से अपराध स्थल (Crime Scene) से अहम सुबूत मिटाने की कोशिश की थी।
डिजिटल साक्ष्यों (Digital Evidence) की भूमिका:
इस केस में अब सारा दारोमदार डिजिटल साक्ष्यों पर टिक गया है। CFSL के साइबर विशेषज्ञ दोनों संदिग्धों के सीज (Seize) किए गए मोबाइल फोन और लैपटॉप से डिलीट (Delete) किए गए व्हाट्सएप चैट्स, कॉल रिकॉर्ड्स और क्लाउड बैकअप को ‘डेटा रिकवरी सॉफ्टवेयर’ के जरिए वापस हासिल कर रहे हैं।
सीबीआई यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि घटना की रात ट्विशा शर्मा आखिरी बार किन लोगों के संपर्क में थी और हत्या के तुरंत बाद इन दोनों संदिग्धों ने किन बड़े अधिकारियों या नेताओं को फोन किया था। रिमांड अवधि बढ़ने का अर्थ है कि सीबीआई को पूछताछ में कुछ ‘कस्टोडियल कन्फेशन’ (हिरासत में कबूलनामा) मिले हैं, जिन्हें अदालत में पुख्ता साक्ष्यों के साथ जोड़ने की आवश्यकता है। पीड़ित परिवार ने उम्मीद जताई है कि सीबीआई की इस सख्ती से आखिरकार ट्विशा को न्याय मिलेगा और असली मास्टरमाइंड जेल की सलाखों के पीछे होगा।



