पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की पार्टी को बड़ा झटका
फाल्टा उपचुनाव में BJP की रिकॉर्ड जीत, TMC की जमानत जब्त, CPI(M) दूसरे नंबर पर

पश्चिम बंगाल की राजनीति में हाल के वर्षों का सबसे बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। दक्षिण 24 परगना जिले की हाई-प्रोफाइल फाल्टा (Falta) विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव (By-election) में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार देवांशु पांडा ने एक ऐतिहासिक और रिकॉर्डतोड़ जीत दर्ज की है। इस चुनाव में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) का अभेद्य किला न केवल ढह गया, बल्कि पार्टी के उम्मीदवार की जमानत भी जब्त हो गई। वहीं, वामदलों (CPI-M) के पुनरुत्थान ने राज्य के भावी राजनीतिक समीकरणों को दिलचस्प बना दिया है।
पश्चिम बंगाल की डायमंड हार्बर लोकसभा सीट (जो अभिषेक बनर्जी का संसदीय क्षेत्र है) के अंतर्गत आने वाली फाल्टा विधानसभा सीट हमेशा से तृणमूल कांग्रेस (TMC) का सबसे मजबूत गढ़ मानी जाती थी। वर्ष 2021 के विधानसभा और 2024 के लोकसभा चुनावों में इस सीट से TMC ने एकतरफा लीड हासिल की थी। लेकिन हाल ही में चुनाव आयोग (Election Commission) के कड़े सुरक्षा घेरे में हुए पुनर्मतदान (Repoll) के जो नतीजे आए हैं, उन्होंने राज्य में ‘सत्ता विरोधी लहर’ (Anti-incumbency) की एक बड़ी बानगी पेश कर दी है।
1.09 लाख वोटों की ऐतिहासिक जीत
रविवार (24 मई 2026) को चुनाव आयोग द्वारा घोषित अंतिम परिणामों के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी (BJP) के युवा उम्मीदवार देवांशु पांडा (Debangshu Panda) ने फाल्टा उपचुनाव में बंपर जीत हासिल की है। पांडा को कुल 1,49,666 वोट मिले, जो कुल मतदान का भारी-भरकम 71.2 प्रतिशत है। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी, CPI(M) के शंभू नाथ कुर्मी (Sambhu Nath Kurmi) को 1,09,021 वोटों के विशाल अंतर से करारी शिकस्त दी है। बंगाल के हालिया चुनावी इतिहास में किसी विधानसभा सीट पर यह सबसे बड़ी जीत का अंतर (Winning Margin) माना जा रहा है।
TMC का पतन: चौथे नंबर पर खिसकी पार्टी
इस चुनाव का सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश तृणमूल कांग्रेस (TMC) की शर्मनाक हार है। जिस पार्टी ने पिछले कई चुनावों से इस सीट पर राज किया था, उसके उम्मीदवार जहांगीर खान (Jahangir Khan) मात्र 7,783 वोटों (3.7 प्रतिशत) पर सिमट कर चौथे स्थान पर रहे और अपनी जमानत (Deposit) तक गवां बैठे। तीसरे नंबर पर कांग्रेस (Congress) के अब्दुर रज्जाक मुल्ला रहे, जिन्हें 10,084 वोट प्राप्त हुए।
क्यों हुए थे फाल्टा में पुनर्मतदान (Repoll)?
यह उपचुनाव अपने आप में बेहद विवादित रहा। 29 अप्रैल को हुए मूल मतदान के दौरान फाल्टा के कई बूथों पर ईवीएम (EVM) में इंक (Ink), चिपकने वाले टेप और वेब-कैमरा फुटेज से छेड़छाड़ की भारी शिकायतें सामने आई थीं। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए, चुनाव आयोग ने 21 मई को फाल्टा के सभी 285 बूथों पर केंद्रीय बलों की 35 कंपनियों (Central Forces) की कड़ी सुरक्षा और सघन निगरानी में पुनर्मतदान कराने का आदेश दिया था।
हिंदू ध्रुवीकरण और अल्पसंख्यक वोटों का बिखराव
राजनीतिक विश्लेषकों (Political Analysts) के अनुसार, फाल्टा के नतीजों में दो बड़े सामाजिक रुझान स्पष्ट रूप से दिखाई दिए हैं:
1. संपूर्ण हिंदू ध्रुवीकरण: राज्य में हाल ही में हुए सत्ता परिवर्तन (Regime Change) और राजनीतिक हिंसा के खिलाफ, फाल्टा के हिंदू मतदाताओं ने एकजुट होकर पूरी तरह से भाजपा (BJP) के पक्ष में मतदान किया।
2. अल्पसंख्यकों का TMC से मोहभंग: फाल्टा में लगभग 30 प्रतिशत अल्पसंख्यक (Minority) मतदाता हैं। अब तक ये वोट एकतरफा TMC को जाते थे, लेकिन इस बार अल्पसंख्यक मतदाताओं ने TMC का साथ छोड़कर भारी संख्या में वामदलों (CPI-M) और कांग्रेस को वोट दिया। CPI(M) को मिले 40,645 वोट (19.3 प्रतिशत) इस बात का सीधा प्रमाण हैं।
विपक्ष और सत्ता पक्ष की प्रतिक्रियाएं
जीत के बाद भाजपा नेताओं में जश्न का माहौल है। विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी (Suvendu Adhikari) ने कहा कि “जब जनता को बिना किसी डर के वोट डालने की आजादी मिली, तो TMC की हार की असलियत सामने आ गई। यह अभिषेक बनर्जी के ‘डायमंड हार्बर मॉडल’ (Diamond Harbour Model) की पूर्ण विफलता है।”
दूसरी ओर, CPI(M) के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने इस नतीजे को वामदलों के लिए एक ‘सिल्वर लाइनिंग’ (Silver Lining) बताते हुए कहा कि अल्पसंख्यक अब TMC के अलावा अन्य विकल्पों की ओर देख रहे हैं। TMC महासचिव अभिषेक बनर्जी ने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए मतगणना प्रक्रिया में विसंगतियों (Inconsistencies) का आरोप लगाया है। यह नतीजा निश्चित रूप से पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत का संकेत दे रहा है।



