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ट्विशा शर्मा मामले में CBI का बड़ा एक्शन

जांच हाथ में लेते ही 48 घंटे के भीतर 2 मुख्य संदिग्ध गिरफ्तार, भोपाल से दिल्ली तक हड़कंप

भोपाल के बहुचर्चित और देश भर में आक्रोश का केंद्र बने ट्विशा शर्मा मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने कमान संभालते ही अपना कड़ा रुख दिखा दिया है। सर्वोच्च न्यायालय में हुई अहम सुनवाई के तुरंत बाद इस संवेदनशील मामले की जांच आधिकारिक रूप से अपने हाथों में लेते ही, सीबीआई की विशेष अपराध शाखा (Special Crime Branch) ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए 2 मुख्य संदिग्धों को गिरफ्तार कर लिया है। इस बड़ी कार्रवाई से स्थानीय पुलिस प्रशासन और रसूखदार गलियारों में हड़कंप मच गया है।

सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के स्वतः संज्ञान और जन-आक्रोश के बाद सीबीआई के हाथों में सौंपे गए ट्विशा शर्मा मामले में न्याय की उम्मीदें तेज हो गई हैं। 25 मई को सर्वोच्च अदालत में हुई तीखी सुनवाई के बाद नई दिल्ली से भोपाल पहुंची सीबीआई की केंद्रीय टीम ने स्थानीय पुलिस से केस डायरी और फॉरेंसिक दस्तावेज अपने कब्जे में लेते ही छापेमारी शुरू कर दी थी। इसी मुस्तैदी का परिणाम है कि जांच एजेंसी ने 48 घंटे के भीतर उन 2 प्रमुख चेहरों को दबोच लिया है, जो अब तक कानून की गिरफ्त से दूर भाग रहे थे।

खुफिया इनपुट और तकनीकी सर्विलांस से हुई गिरफ्तारी

सीबीआई मुख्यालय के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, हिरासत में लिए गए दोनों संदिग्धों की गतिविधियां घटना के दिन से ही संदिग्ध थीं। स्थानीय पुलिस की ढीली कार्रवाई के कारण ये दोनों राज्य की सीमा पार कर भागने की फिराक में थे। सीबीआई की तकनीकी सेल ने दोनों संदिग्धों के मोबाइल नंबरों को सर्विलांस पर लिया और उनकी कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDR) का गहन विश्लेषण किया।

जब दोनों संदिग्धों की लोकेशन भोपाल के बाहरी इलाके में एक गुप्त ठिकाने पर मिली, तो सीबीआई की विशेष टीम ने स्थानीय पुलिस को बिना भनक लगे तड़के सुबह वहां घेराबंदी की और दोनों को धर दबोचा। दोनों संदिग्धों को तुरंत एक अज्ञात और सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया है, जहां दिल्ली से आए वरिष्ठ जांच अधिकारी उनसे पूछताछ कर रहे हैं।

सबूतों के साथ छेड़छाड़ और रसूखदारों को बचाने का आरोप

ट्विशा शर्मा मामले में शुरुआत से ही यह आरोप लग रहा था कि घटना के पीछे कुछ बेहद रसूखदार और राजनीतिक संबंध रखने वाले लोगों का हाथ है। पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया था कि स्थानीय पुलिस पर भारी प्रशासनिक दबाव था, जिसके कारण मुख्य आरोपियों के खिलाफ समय पर कार्रवाई नहीं की गई।

सीबीआई की नई प्राथमिकी (FIR) में इस बात का स्पष्ट उल्लेख है कि गिरफ्तार किए गए इन 2 संदिग्धों पर न केवल अपराध में शामिल होने, बल्कि घटना के तुरंत बाद सबूतों को नष्ट करने (Tampering of Evidence) और गवाहों को डराने-धमकाने का भी गंभीर आरोप है। सूत्रों का कहना है कि इन दोनों से मिलने वाले सुराग इस मामले के मुख्य मास्टरमाइंड (Mastermind) तक पहुंचने की कड़ी साबित होंगे।

फॉरेंसिक जांच के लिए CFSL की टीम भोपाल रवाना

सीबीआई केवल मौखिक बयानों पर निर्भर नहीं रह रही है, बल्कि वह वैज्ञानिक साक्ष्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। नई दिल्ली की केंद्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (CFSL) की एक 5 सदस्यीय विशेषज्ञ टीम को भोपाल के लिए रवाना कर दिया गया है।

यह फॉरेंसिक टीम उस मूल घटनास्थल (Crime Scene) का नए सिरे से वैज्ञानिक मुआयना करेगी, जिसे स्थानीय पुलिस ने कथित तौर पर सुरक्षित नहीं रखा था। डिजिटल साक्ष्यों, जैसे घटना के समय के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज, संदिग्धों के सोशल मीडिया चैट और डिलीट किए गए डेटा को रिकवर करने के लिए साइबर विशेषज्ञों की भी मदद ली जा रही है।

स्थानीय पुलिस की भूमिका की भी होगी जांच

सीबीआई की इस त्वरित कार्रवाई ने मध्य प्रदेश की स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली को पूरी तरह से कटघरे में खड़ा कर दिया है। जिस काम को स्थानीय पुलिस कई दिनों की जांच के बाद भी नहीं कर सकी, उसे सीबीआई ने महज 48 घंटे में कर दिखाया।

अदालती निर्देशों के अनुसार, सीबीआई इस बात की भी समानांतर जांच कर रही है कि स्थानीय पुलिस के किन अधिकारियों ने जांच में ढिलाई बरती और क्या किसी आरोपी को जानबूझकर भागने का अवसर दिया गया। आने वाले दिनों में कुछ पुलिसकर्मियों से भी इस संबंध में पूछताछ की जा सकती है। ट्विशा शर्मा के परिजनों ने सीबीआई की इस पहली बड़ी कार्रवाई पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा है कि उन्हें देश की इस सर्वोच्च जांच एजेंसी पर पूरा भरोसा है कि वह उनकी बेटी को न्याय दिलाएगी। आगामी सप्ताह में सीबीआई इस प्रारंभिक प्रगति की एक सीलबंद रिपोर्ट सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष भी प्रस्तुत कर सकती है।

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