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गगनयान मिशन की सुरक्षा में इसरो की ‘महा-कूद’

अंतरिक्ष कचरे से अंतरिक्ष यात्रियों को बचाने के लिए नए रडार का सफल परीक्षण

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO – इसरो) ने भारत के अंतरिक्ष विज्ञान के इतिहास में एक और शानदार मील का पत्थर स्थापित कर दिया है। भारत के पहले मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन, ‘गगनयान’ (Gaganyaan), की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए इसरो ने मंगलवार सुबह ‘स्पेस डेब्रिस ट्रैकिंग रडार’ (Space Debris Tracking Radar) का सफल परीक्षण किया है। यह विशेष रडार प्रणाली अंतरिक्ष में भारत की एक अत्यंत पैनी और स्वदेशी ‘आंख’ की तरह काम करेगी, जिसका मुख्य उद्देश्य हमारे अंतरिक्ष यात्रियों और क्रू मॉड्यूल (Crew Module) को अंतरिक्ष में तैरते हुए जानलेवा ‘कचरे’ (Space Junk) से बचाना है। यह परीक्षण आत्मनिर्भर भारत और अंतरिक्ष रक्षा तकनीक का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

अंतरिक्ष कचरा (Space Debris): एक अदृश्य और जानलेवा खतरा:
आम लोगों के लिए अंतरिक्ष एक खाली और शांत जगह हो सकती है, लेकिन वास्तविकता इसके बिल्कुल विपरीत है। पृथ्वी की निचली कक्षा (Low Earth Orbit – LEO) में पुराने और निष्क्रिय उपग्रहों (Dead Satellites), रॉकेट के अवशेषों और यहां तक कि पेंट के छोटे टुकड़ों का एक विशाल भंडार तैर रहा है। इसे ही ‘स्पेस डेब्रिस’ या अंतरिक्ष कचरा कहा जाता है।
समस्या यह है कि ये कचरे के टुकड़े पृथ्वी की परिक्रमा करते हुए लगभग 28,000 किलोमीटर प्रति घंटे (गोली की गति से भी कई गुना अधिक) की रफ्तार से उड़ रहे हैं। इस अत्यधिक गति के कारण, अंतरिक्ष कचरे का मात्र एक सेंटीमीटर का टुकड़ा भी यदि गगनयान के कैप्सूल या अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) से टकरा जाए, तो वह एक भयंकर विस्फोट कर सकता है और अंतरिक्ष यात्रियों की जान ले सकता है।

इसरो के नए रडार की मारक क्षमता और कार्यप्रणाली:
अंतरिक्ष में किसी दुर्घटना से बचने का एकमात्र तरीका यह है कि इस कचरे की सटीक स्थिति (Location) और उसकी कक्षा (Orbit) का पहले से ही अनुमान लगा लिया जाए, ताकि अंतरिक्ष यान का रास्ता समय रहते बदला जा सके। इसरो द्वारा विकसित यह नया ‘स्पेस डेब्रिस ट्रैकिंग रडार’ यही काम करता है।

अत्यंत उन्नत ‘फेज्ड एरे’ (Phased Array) तकनीक पर आधारित यह रडार कई सौ किलोमीटर दूर अंतरिक्ष में उड़ रहे 10 सेंटीमीटर जितने छोटे कचरे के टुकड़े को भी सटीकता से ट्रैक करने में सक्षम है। यह लगातार अंतरिक्ष को ‘स्कैन’ (Scan) करता रहता है और कचरे के प्रक्षेपवक्र (Trajectory) की गणना करता है। यदि कोई भी संदिग्ध वस्तु गगनयान मिशन के रास्ते में आती दिखाई देगी, तो यह रडार तुरंत पृथ्वी पर स्थित कंट्रोल रूम (IISTRAC) को अलर्ट भेज देगा, जिससे इसरो के वैज्ञानिक क्रू मॉड्यूल को सुरक्षित दिशा में मोड़ (Collision Avoidance Maneuver) सकेंगे।

‘गगनयान’ के लिए अनिवार्यता और आत्मनिर्भरता:
गगनयान मिशन के तहत इसरो का लक्ष्य 3 भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों (गगननॉट्स) को अंतरिक्ष में भेजना और उन्हें सुरक्षित पृथ्वी पर वापस लाना है। जब मानव जीवन दांव पर हो, तो सुरक्षा में चूक की कोई गुंजाइश नहीं होती। अब तक, अंतरिक्ष में मलबे की ट्रैकिंग के लिए भारत को मुख्य रूप से अमेरिकी एजेंसी NORAD या अन्य अंतरराष्ट्रीय डेटा नेटवर्क पर निर्भर रहना पड़ता था। लेकिन इस रडार के सफल परीक्षण के साथ, भारत अंतरिक्ष डोमेन अवेयरनेस (Space Domain Awareness – SDA) के क्षेत्र में पूरी तरह से आत्मनिर्भर (Self-reliant) हो गया है।

‘स्पेस डेब्रिस ट्रैकिंग रडार’ का सफल परीक्षण न केवल गगनयान मिशन के लिए एक अभेद्य सुरक्षा कवच तैयार करता है, बल्कि यह भविष्य में भारत की बेशकीमती सैटेलाइट संपत्तियों की रक्षा भी करेगा। अंतरिक्ष अब एक भीड़भाड़ वाला क्षेत्र बन चुका है, और इसरो ने यह साबित कर दिया है कि वह न केवल उपग्रह लॉन्च करने में वैश्विक लीडर है, बल्कि अंतरिक्ष की जटिलताओं और खतरों से निपटने में भी किसी से पीछे नहीं है। यह रडार उन तीन भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षित वापसी की सबसे बड़ी गारंटी बनेगा जो गगनयान के जरिए इतिहास रचने की तैयारी कर रहे हैं।

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