रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर प्रश्न
मध्य प्रदेश के रतलाम के समीप त्रिवेंद्रम-हजरत निजामुद्दीन राजधानी एक्सप्रेस में भीषण अग्निकांड

भारतीय रेलवे को देश की जीवनरेखा माना जाता है, जिसमें प्रतिदिन करोड़ों नागरिक यात्रा करते हैं। ऐसे में, जब देश की सबसे प्रतिष्ठित और सुरक्षित मानी जाने वाली ‘राजधानी एक्सप्रेस’ जैसी रेलगाड़ियों में कोई बड़ी दुर्घटना होती है, तो यह संपूर्ण यात्री सुरक्षा तंत्र पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा देती है। हाल ही में, केरल की राजधानी त्रिवेंद्रम से चलकर दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन आ रही त्रिवेंद्रम-हजरत निजामुद्दीन राजधानी एक्सप्रेस में मध्य प्रदेश के रतलाम के समीप एक भीषण अग्निकांड हुआ। ट्रेन के वातानुकूलित बी-1 (B-1) कोच में अचानक आग भड़क उठी, जिसने यात्रियों के बीच भारी दहशत का वातावरण उत्पन्न कर दिया।
दुर्घटना का घटनाक्रम और राहत कार्य:
प्रारंभिक सूचनाओं के अनुसार, जब यह तेज रफ्तार रेलगाड़ी रतलाम स्टेशन के आस-पास के क्षेत्र से गुजर रही थी, तभी बी-1 कोच के निचले हिस्से या विद्युत पैनल से धुएं का गुबार उठता हुआ दिखाई दिया। वातानुकूलित (एसी) कोच होने के कारण धुआं तेजी से अंदर फैलने लगा। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए लोको पायलट और गार्ड ने आपातकालीन ब्रेक लगाकर ट्रेन को तत्काल रोका। स्थानीय प्रशासन, रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और अग्निशमन दल को तुरंत सूचित किया गया।
राहत एवं बचाव कार्य युद्ध स्तर पर आरंभ किया गया। सबसे पहली प्राथमिकता कोच में फंसे यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालना था। खिड़कियों के शीशे तोड़कर और आपातकालीन द्वारों का उपयोग करके यात्रियों को निकाला गया। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, समय रहते ट्रेन रुकने और बचाव कार्य शुरू होने से एक बड़ी जनहानि टल गई। प्रभावित कोच को ट्रेन से अलग कर दिया गया है ताकि आग अन्य डिब्बों तक न फैले।
कारणों की जांच और सुरक्षा मानकों की समीक्षा:
इस भीषण दुर्घटना के कारणों का अभी तक सटीक पता नहीं चल सका है, किंतु प्रथम दृष्टया यह ‘शॉर्ट सर्किट’ (विद्युत परिपथ में खराबी) या पहियों के ब्रेक बाइंडिंग की समस्या प्रतीत होती है। रेलवे मंत्रालय ने इस घटना की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं। रेलवे सुरक्षा आयुक्त (CRS) इस बात की गहन जांच करेंगे कि कोच में लगे अग्नि-रोधी उपकरण (Fire Retardant Materials) और स्मोक डिटेक्टर (धुआं सूचक यंत्र) ने समय पर कार्य किया या नहीं।
यह दुर्घटना भारतीय रेलवे के लिए एक गंभीर चेतावनी है। यद्यपि रेलवे ने हाल के वर्षों में पटरियों के नवीनीकरण और नई तकनीक के समावेश पर भारी निवेश किया है, किंतु कोच के भीतर विद्युत सुरक्षा और अग्नि शमन प्रणालियों का नियमित और कठोर ऑडिट अत्यंत आवश्यक है। यात्रियों का विश्वास बनाए रखने के लिए यह सुनिश्चित करना होगा कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और दोषियों या लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।



