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यूपी एटीएस (ATS) का बड़ा प्रहार: आईएसआई (ISI) समर्थित स्लीपर सेल का भंडाफोड़, दो संदिग्ध गिरफ्तार, एक बड़ी आतंकी साजिश नाकाम

लखनऊ (क्राइम एवं राष्ट्रीय सुरक्षा डेस्क): उत्तर प्रदेश को दहलाने और प्रदेश की शांति व्यवस्था को भंग करने की एक बहुत बड़ी अंतरराष्ट्रीय साजिश को ‘उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ते’ (UP ATS) ने समय रहते पूरी तरह से विफल कर दिया है। एक अत्यंत गोपनीय और त्वरित कार्रवाई (Surgical Operation) के तहत, यूपी एटीएस ने पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ‘आईएसआई’ (ISI) से सीधे संबंध रखने वाले दो बेहद खतरनाक संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार करने में एक बड़ी सफलता हासिल की है। इस त्वरित कार्रवाई ने राज्य को एक संभावित और भयानक आतंकी हमले से बचा लिया है।

खुफिया सूचना और एटीएस का सटीक ऑपरेशन
सुरक्षा एजेंसियों के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ समय से उत्तर प्रदेश के कुछ संवेदनशील इलाकों में सीमा पार से ‘संदिग्ध वित्तीय लेन-देन’ (Terror Funding) और एन्क्रिप्टेड चैट (Encrypted Chat) के माध्यम से संचार की खुफिया जानकारी मिल रही थी। केंद्रीय खुफिया एजेंसियों के इनपुट को विकसित करते हुए, एटीएस की कई टीमों ने इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस (Electronic Surveillance) और जमीनी मुखबिरों का जाल बिछाया। इसी के परिणामस्वरूप, इन दोनों संदिग्धों को उस समय दबोच लिया गया, जब वे अपने नापाक मंसूबों को अंतिम रूप देने की तैयारी कर रहे थे।

क्या था आतंकियों का खौफनाक मंसूबा?
प्रारंभिक पूछताछ और उनके पास से बरामद किए गए डिजिटल उपकरणों (लैपटॉप, पेन ड्राइव और मोबाइल फोन) की जांच से यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि ये संदिग्ध ‘आईएसआई’ के आकाओं के सीधे संपर्क में थे। इनका मुख्य लक्ष्य प्रदेश के भीड़भाड़ वाले रेलवे स्टेशनों, प्रमुख धार्मिक स्थलों और कुछ महत्वपूर्ण राजनीतिक व सामाजिक हस्तियों को निशाना बनाना था। वे राज्य में ‘स्लीपर सेल’ (Sleeper Cell) का एक नया नेटवर्क तैयार कर रहे थे और स्थानीय युवाओं का ‘ब्रेनवॉश’ कर उन्हें अपने साथ जोड़ने की फिराक में थे।

संदिग्ध दस्तावेज और विदेशी फंडिंग के साक्ष्य
गिरफ्तार किए गए दोनों संदिग्धों के पास से कई फर्जी पहचान पत्र, नक्शे, भड़काऊ साहित्य और विदेशी बैंक खातों के माध्यम से हुई फंडिंग के पुख्ता सुबूत (Money Trail) बरामद किए गए हैं। एटीएस अब इस बात की गहनता से जांच कर रही है कि इन संदिग्धों को स्थानीय स्तर पर पनाह और रसद (Logistics) कौन मुहैया करा रहा था। इस नेटवर्क से जुड़े अन्य संभावित गुर्गों की तलाश में राज्य के कई हिस्सों में सघन छापेमारी अभी भी जारी है।

यूपी एटीएस की यह शानदार कामयाबी आतंकवाद के खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ (Zero Tolerance) नीति का एक प्रत्यक्ष उदाहरण है। यह ऑपरेशन स्पष्ट रूप से यह संदेश देता है कि देश विरोधी ताकतों के मंसूबे चाहे कितने भी खतरनाक क्यों न हों, भारत की आंतरिक सुरक्षा एजेंसियां उनसे निपटने और उन्हें नेस्तनाबूद करने के लिए पूरी तरह से मुस्तैद और सक्षम हैं।

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