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भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था में क्रांति

आरबीआई द्वारा 'ई-रुपया' के राष्ट्रव्यापी विस्तार हेतु नए तकनीकी दिशा-निर्देश और भविष्य की रूपरेखा

नई दिल्ली (अर्थव्यवस्था एवं बैंकिंग डेस्क): भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने भारत को ‘कैशलेस इकोनॉमी’ बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए अपनी सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) यानी ‘ई-रुपया’ (e-Rupee) के राष्ट्रव्यापी विस्तार के लिए नए तकनीकी दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। इन दिशा-निर्देशों का मुख्य उद्देश्य डिजिटल मुद्रा के उपयोग को सुगम बनाना, सुरक्षा बढ़ाना और देश के दूरदराज के क्षेत्रों तक इसकी पहुँच सुनिश्चित करना है।

तकनीकी दिशा-निर्देशों के मुख्य बिंदु
आरबीआई द्वारा जारी नई रूपरेखा में डिजिटल रुपये की ‘ऑफलाइन’ उपयोगिता पर विशेष जोर दिया गया है। अब बिना इंटरनेट के भी ई-रुपये के माध्यम से लेन-देन संभव होगा, जो ग्रामीण भारत के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है। इसके अलावा, सुरक्षा के लिए ‘मल्टी-लेयर एन्क्रिप्शन’ और ‘ब्लॉकचेन’ तकनीक को और अधिक सुदृढ़ किया गया है ताकि डेटा चोरी या धोखाधड़ी की संभावना शून्य रहे। आरबीआई ने बैंकों को निर्देश दिया है कि वे अपने मोबाइल ऐप्स को इस प्रकार अपडेट करें कि उपयोगकर्ता भौतिक नकदी और डिजिटल मुद्रा के बीच आसानी से ‘स्विच’ कर सकें।

ई-रुपया बनाम भौतिक नकदी
ई-रुपया भौतिक नोट का डिजिटल स्वरूप है, जिसकी कीमत और मूल्य वही रहेगा। इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसे रखने के लिए बैंक खाते की अनिवार्यता नहीं होगी; इसे सीधे डिजिटल वॉलेट में रखा जा सकेगा। इससे नोटों की छपाई, उनके रखरखाव और वितरण पर होने वाले करोड़ों रुपये के खर्च की बचत होगी। साथ ही, यह मुद्रा पूरी तरह से ‘अपरिवर्तनीय’ और सुरक्षित है क्योंकि इसे स्वयं केंद्रीय बैंक की गारंटी प्राप्त है।

ई-रुपये का राष्ट्रव्यापी विस्तार भारत के वित्तीय परिदृश्य को पूरी तरह बदल देगा। यह न केवल वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) को बढ़ावा देगा, बल्कि भ्रष्टाचार और काले धन पर भी लगाम लगाएगा। आने वाले समय में, ई-रुपया अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भी भुगतान का एक प्रमुख माध्यम बन सकता है, जिससे भारतीय रुपये की वैश्विक साख बढ़ेगी।

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