ब्रह्मांड में महाखोज: जेम्स वेब टेलिस्कोप को ‘दूसरी पृथ्वी’ पर मिले ऑक्सीजन के संकेत, खगोल विज्ञान में मची हलचल

वाशिंगटन (स्पेस एवं साइंस डेस्क): क्या हम इस अनंत ब्रह्मांड में अकेले हैं? यह सवाल मानव सभ्यता की शुरुआत से ही हमारे जहन में रहा है। लेकिन अब, अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) के जेम्स वेब स्पेस टेलिस्कोप (JWST) ने एक ऐसी युगांतरकारी खोज की है, जो इस सवाल का जवाब हमेशा के लिए बदल सकती है। अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र से आई सबसे बड़ी खबर के अनुसार, जेम्स वेब टेलिस्कोप ने हमारे सौरमंडल से दूर स्थित एक ‘एक्सोप्लैनेट’ (जिसे ‘दूसरी पृथ्वी’ या Earth 2.0 कहा जा रहा है) के वायुमंडल में ‘ऑक्सीजन’ (Oxygen) की मौजूदगी के स्पष्ट शुरुआती संकेत दिए हैं। इस अभूतपूर्व खोज ने दुनिया भर के खगोलविदों और वैज्ञानिकों के बीच भारी हलचल और उत्साह पैदा कर दिया है।
ऑक्सीजन का मिलना क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
विज्ञान की दुनिया में, किसी अन्य ग्रह के वायुमंडल में आणविक ऑक्सीजन (O2) का पाया जाना ‘एलियन जीवन’ (Alien Life) का सबसे बड़ा और पुख्ता ‘बायोसिग्नेचर’ (जैविक संकेत) माना जाता है। ऑक्सीजन एक अत्यधिक प्रतिक्रियाशील (Reactive) गैस है। इसका अर्थ यह है कि यदि किसी ग्रह पर ऑक्सीजन मौजूद है, तो वह बहुत जल्दी अन्य तत्वों के साथ मिलकर खत्म हो जाती है, जब तक कि कोई ऐसी प्रक्रिया न हो जो लगातार नई ऑक्सीजन पैदा कर रही हो। पृथ्वी पर यह काम पेड़-पौधे और फाइटोप्लांकटन ‘प्रकाश संश्लेषण’ (Photosynthesis) के जरिए करते हैं। इसलिए, ‘दूसरी पृथ्वी’ पर ऑक्सीजन के संकेत मिलने का सीधा मतलब यह निकाला जा रहा है कि वहां किसी न किसी रूप में (चाहे वह सूक्ष्मजीव हों या वनस्पति) जीवन पनप रहा है, जो लगातार ऑक्सीजन उत्सर्जित कर रहा है।
कैसे हुई यह ऐतिहासिक खोज?
जेम्स वेब टेलिस्कोप ने अपनी सबसे उन्नत ‘ट्रांसमिशन स्पेक्ट्रोस्कोपी’ (Transmission Spectroscopy) तकनीक का उपयोग करके इस ग्रह का अध्ययन किया। जब यह ग्रह अपने मातृ तारे (Host Star) के सामने से गुजरा, तो तारे की रोशनी इस ग्रह के वायुमंडल से छनकर जेम्स वेब तक पहुंची। टेलिस्कोप के इन्फ्रारेड उपकरणों ने उस रोशनी को अलग-अलग रंगों (स्पेक्ट्रम) में बांटकर उसका बारीकी से विश्लेषण किया। इस विश्लेषण में एक विशिष्ट ‘डार्क लाइन’ दिखाई दी, जो बिल्कुल वैसी ही थी जैसी ऑक्सीजन गैस रोशनी को सोखने पर बनाती है। यह ग्रह अपने तारे के ‘गोल्डीलॉक्स ज़ोन’ (Habitable Zone) में है, जहां पानी के तरल अवस्था में रहने के लिए तापमान बिल्कुल अनुकूल है।
खगोल विज्ञान में आया नया युग
इस खोज ने अंतरिक्ष अन्वेषण की पूरी दिशा को बदल कर रख दिया है। हार्वर्ड और एमआईटी के शीर्ष खगोलविदों का कहना है कि यह अब तक की सबसे बड़ी खोजों में से एक है। अब तक हम केवल पानी या कार्बन के संकेत तलाश रहे थे, लेकिन ऑक्सीजन का मिलना ‘होली ग्रेल’ (Holy Grail) हासिल करने जैसा है। इस खबर के बाद पूरी दुनिया की अंतरिक्ष एजेंसियों ने अपने भविष्य के मिशनों को इसी ग्रह पर केंद्रित करने का फैसला किया है।
भविष्य की राह
वैज्ञानिक अभी इस बात को लेकर सतर्क हैं और इसे ‘शुरुआती संकेत’ बता रहे हैं। आने वाले महीनों में जेम्स वेब टेलिस्कोप इस ग्रह का और अधिक समय तक अवलोकन करेगा ताकि इन डेटा को 100% प्रमाणित किया जा सके। यदि अंतिम पुष्टि हो जाती है, तो यह मानव इतिहास का वह क्षण होगा जब हम आधिकारिक तौर पर जान पाएंगे कि पृथ्वी के अलावा भी कहीं जीवन मौजूद है। यह खोज यकीनन हमारी आने वाली पीढ़ियों की विज्ञान की किताबों का पहला पन्ना होगी।



