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पीएम किसान सम्मान निधि: अब फार्मर रजिस्ट्री हुई अनिवार्य

खतौनी और आधार की गलतियां सुधारने के सख्त निर्देश

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-Kisan) योजना के तहत आर्थिक लाभ प्राप्त कर रहे किसानों के लिए एक बेहद जरूरी और अहम खबर है। कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता लाने, बिचौलियों के हस्तक्षेप को खत्म करने और सरकारी योजनाओं का लाभ शत-प्रतिशत असली किसानों तक पहुंचाने के उद्देश्य से सरकार ने ‘फार्मर रजिस्ट्री’ (Farmer Registry) यानी ‘यूनिक किसान आईडी’ को अब अनिवार्य कर दिया है। 12 अप्रैल 2026 की नवीनतम प्रशासनिक समीक्षाओं और निर्देशों के अनुसार, जिन किसानों ने अभी तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं की है, वे अब सरकारी सुविधाओं से वंचित हो सकते हैं।

खतौनी और आधार की गलतियों को सुधारने के सख्त निर्देश
हाल ही में उत्तर प्रदेश के जौनपुर सहित विभिन्न जिलों के जिलाधिकारियों ने जन सेवा केंद्रों और कृषि विभाग के कार्यों की जमीनी स्तर पर गहन समीक्षा की है। समीक्षा के दौरान यह बात सामने आई कि बड़ी संख्या में किसानों का पंजीकरण उनके दस्तावेजों में मौजूद खामियों के कारण अटका हुआ है। इसे गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने राजस्व कर्मियों, लेखपालों और संबंधित अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि किसानों की जमीन के कागजात (खतौनी) और आधार कार्ड में नाम या अन्य विवरण की जो भी गलतियां हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर सुधारा जाए। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि डेटा बेमेल (Data mismatch) होने की स्थिति में ‘फार्मर आईडी’ जनरेट नहीं हो सकेगी।

फार्मर रजिस्ट्री (किसान आईडी) आखिर क्या है?
फार्मर रजिस्ट्री भारत सरकार के महत्वाकांक्षी डिजिटल मिशन ‘एग्रीस्टैक’ (AgriStack) का एक प्रमुख हिस्सा है। यह आधार कार्ड की तर्ज पर किसानों के लिए एक डिजिटल पहचान पत्र है। इस एक डिजिटल आईडी में किसान का व्यक्तिगत विवरण (आधार के माध्यम से), उसकी भूमि का विवरण (खसरा-खतौनी के माध्यम से), और बैंक खाते की जानकारी एक साथ लिंक होती है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि एक बार यह आईडी बन जाने के बाद, किसानों को हर नई सरकारी योजना के लिए बार-बार अपने दस्तावेज जमा करने या केवाईसी (KYC) करवाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

रजिस्ट्री न होने पर किन-किन सुविधाओं पर लगेगा ब्रेक?
यदि किसान समय रहते अपना ‘फार्मर आईडी’ नहीं बनवाते हैं, तो उन्हें भविष्य में कई नुकसान उठाने पड़ सकते हैं:
* सम्मान निधि पर रोक: पीएम किसान योजना की आगामी किस्तें केवल उन्हीं किसानों के बैंक खातों में भेजी जाएंगी, जिनकी फार्मर रजिस्ट्री पूरी हो चुकी है।
* फसल की सरकारी खरीद: भविष्य में सरकारी क्रय केंद्रों पर एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) के तहत गेहूं या धान बेचने के लिए अब यह आईडी दिखाना अनिवार्य होगा।
* सब्सिडी का लाभ: कृषि विभाग की ओर से मिलने वाली उर्वरक (खाद), उन्नत बीज और कृषि यंत्रों पर मिलने वाली सब्सिडी बिना इस आईडी के नहीं दी जाएगी।
* अन्य योजनाएं: किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) का सीधा लाभ प्राप्त करने के लिए भी फार्मर आईडी अत्यंत आवश्यक होगी।

पंजीकरण की प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेज
प्रशासन ने किसानों की सुविधा के लिए इस प्रक्रिया को बेहद सुलभ बना दिया है। प्रत्येक राजस्व गांव और पंचायत भवन स्तर पर इसके लिए विशेष कैंप आयोजित किए जा रहे हैं।
* जरूरी दस्तावेज: किसानों को पंजीकरण के लिए अपना आधार कार्ड, भूमि की नवीनतम खतौनी और आधार से लिंक किया हुआ मोबाइल नंबर साथ ले जाना होगा, क्योंकि पूरी प्रक्रिया मोबाइल पर आने वाले ओटीपी (OTP) के जरिए ही सत्यापित होती है।
* कहाँ कराएं रजिस्ट्रेशन: किसान भाई अपने नजदीकी जन सेवा केंद्र (CSC) या गांव में लगाए जा रहे विशेष कैंपों में जाकर लेखपाल और पंचायत सहायकों की मदद से निःशुल्क फार्मर आईडी बनवा सकते हैं। इसके अलावा, जो किसान स्मार्टफोन या इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं, वे राज्य के फार्मर रजिस्ट्री पोर्टल (जैसे उत्तर प्रदेश में upfr.agristack.gov.in) पर जाकर खुद भी अपना ऑनलाइन पंजीकरण कर सकते हैं।

सरकार की यह पहल ‘डिजिटल इंडिया’ के तहत कृषि व्यवस्था को सुदृढ़ करने का एक बड़ा और सकारात्मक प्रयास है। प्रशासन की ओर से सभी किसानों से यह अपील की जा रही है कि वे अंतिम समय की भागदौड़ से बचने के लिए जल्द से जल्द अपने दस्तावेजों की कमियों को दूर कराएं और अपनी फार्मर रजिस्ट्री सुनिश्चित करें। यह एक कदम किसानों के भविष्य को सुरक्षित करने और सरकारी योजनाओं की पहुंच को उनके दरवाजे तक आसान बनाने में मील का पत्थर साबित होगा।

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