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मोहनजोदड़ो की खोज करने वाले पुरातत्वविद् राखालदास की जयंती पर जानिए उनसे जुड़ी खास बातें :

यदि आप इतिहास में दिलचस्पी रखते हैं तो आप पुरातात्विक स्थलों और उनके खोजकर्ताओं के बारे में जानकारी रखते ही होंगे। आज 12 अप्रैल को एक ऐसे ही इतिहासकार पुरातत्वविद व्यक्ति की जयंती है जिन्हें सिंधु घाटी सभ्यता से जुड़े स्थलों की खोज के लिए इतिहास में आज भी याद किया जाता है और जब तक मोहनजोदड़ो हड़प्पा का नाम रहेगा तब तक उन्हें भूला नही जा सकता। राखालदास बंद्योपाध्याय जिन्हें आर.डी. बनर्जी भी कहा जाता है वही भारत के प्रसिद्ध इतिहासकार और पुरातत्वविद् थे। उनका जन्म 12 अप्रैल 1885 को पश्चिम बंगाल में हुआ था। इसी दिन उनकी जयंती मनाई जाती है। राखालदास को मोहनजोदड़ो की खोज के लिए जाना जाता है और उनकी इस उपलब्धि ने सभ्यता को समझने में मदद की। राखालदास की जयंती के अवसर पर आइए जानते हैं कि मोहनजोदड़ो के खोजकर्ता राखालदास बनर्जी कौन थे? (Rakhaldas Banerjee )

राखालदास बनर्जी इतिहासकार और पुरातत्त्ववेत्ता थे। 1922 में एक बौद्ध स्तूप की खुदाई के सिलसिले में मोहनजोदड़ो की प्राचीन सभ्यता की खोज की थी उनकी मुख्य रचनाएँ हैं: द ओरिजिन ऑफ़ बंगाली स्क्रिप्ट, हिस्ट्री ऑफ़ ओरिसा, ईस्टर्न स्कूल ऑफ़ मेडडीवल स्कल्पचर आदि। वे भारत के एक प्रसिद्ध इतिहासकार और पुरातत्वविद् थे। उनका जन्म 12 अप्रैल 1885 को पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के बेहरामपुर में हुआ था। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से इतिहास में एम.ए. की डिग्री हासिल की और 1910 में भारतीय संग्रहालय, कोलकाता में काम शुरू किया। बाद में वे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग से जुड़ गए और 1917 में उन्हें पश्चिमी सर्कल का प्रमुख नियुक्त किया गया। आर.डी. बनर्जी (Rakhaldas Banerjee in Hindi) को सबसे ज्यादा प्रसिद्धि तब मिली जब उन्होंने सिंधु घाटी सभ्यता के प्रमुख स्थल मोहनजोदड़ो की खोज की। यह खोज भारतीय इतिहास के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है, जिसने सभ्यता की जड़ों को और गहराई से समझने में मदद की। वे सिर्फ एक खोजकर्ता ही नहीं थे बल्कि उन्होंने बांग्ला लिपि की उत्पत्ति पर भी गहन अध्ययन किया।

इतिहास की स्टडी के लिए लिखीं किताबें (Rakhaldas Banerjee Jayanti) :

राखालदास की प्रसिद्ध पुस्तक “द ओरिजिन ऑफ द बंगाली स्क्रिप्ट” को कलकत्ता विश्वविद्यालय से जुबली रिसर्च अवार्ड भी मिला था। इसके अलावा उन्होंने छात्रों के लिए दो किताबें- हिस्ट्री ऑफ इंडिया (1924) और ए जूनियर हिस्ट्री ऑफ इंडिया (1928) लिखीं जो आज भी ऐतिहासिक अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। आर.डी. बनर्जी का जीवन एक उदाहरण है कि समर्पण और खोज की भावना से कैसे इतिहास के अनछुए पहलुओं को सामने लाया जा सकता है।

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