टेस्ट क्रिकेट पर मंडराता संकट: 50 सालों में पहली बार 148 दिनों का ‘सूखा’
8 जनवरी को सिडनी में एशेज सीरीज का आखिरी टेस्ट मैच इस साल खत्म हुआ था, जबकि अगला टेस्ट मैच 4 जून से लंदन के लॉर्ड्स में इंग्लैंड और न्यूजीलैंड के बीच शेड्यूल है। इस बीच 148 दिनों यानी लगभग 5 महीने का अंतराल है।
इसे देखकर कहा जा सकता है कि टेस्ट क्रिकेट अपनी प्राथमिकता खोता जा रहा है, क्योंकि पिछले 50 साल से अधिक के इतिहास में इतना लंबा गैप दो टेस्ट मैचों के बीच कभी नहीं रहा। यह निश्चित रूप से चिंता का विषय है।
इस दौरान क्रिकेट प्रेमियों को भरपूर मात्रा में टी20 क्रिकेट देखने को मिलेगा। दरअसल, एक क्रिकेट साइट के स्टेटिशियन ने उन आंकड़ों को निकाला है, जब टेस्ट मैचों के बीच सबसे लंबा अंतराल देखने को मिला। यहाँ तक कि कोविड के दौरान भी इतने लंबे गैप का सामना नहीं करना पड़ा जितना कि 2026 में होगा।

टेस्ट क्रिकेट में दूसरा सबसे लंबा अंतराल अब तक 176 दिनों का है। यह तब हुआ था जब ओवल में इंग्लैंड पर भारत की ऐतिहासिक जीत (24 अगस्त 1971) के लगभग छह महीने बाद कोई टेस्ट मैच खेला गया, जबकि न्यूजीलैंड की टीम उस समय वेस्टइंडीज पहुंची थी और 16 फरवरी 1972 से टेस्ट मैच शुरू हुआ था।
1972 के बाद पहली बार ऐसा लंबा अंतराल टेस्ट क्रिकेट में देखने को मिलेगा कि जनवरी के बाद सीधे जून में कोई टेस्ट मैच खेला जाएगा। इस 148 दिनों के अंतराल को देखकर आप हैरान रह जाएंगे कि द्वितीय विश्व युद्ध 1945 के बाद से इससे लंबे अंतराल केवल दो ही बार हुए हैं।
सबसे लंबा अंतराल 262 दिनों (लगभग सात महीने) का था, जब 1970 में 10 मार्च को साउथ अफ्रीका बनाम ऑस्ट्रेलिया सीरीज खत्म हुई थी और इसके बाद 27 नवंबर 1970 को ऑस्ट्रेलिया में एशेज सीरीज की शुरुआत हुई थी। हालांकि, टेस्ट क्रिकेट में अब तक सबसे लंबा अंतराल 28 महीनों का रिकॉर्ड है।
आमतौर पर आपको लगभग हर महीने कुछ टेस्ट मैच देखने को मिलते हैं, लेकिन इंटरनेशनल क्रिकेट का शेड्यूल अब अधिकतर व्हाइट बॉल क्रिकेट को प्राथमिकता दे रहा है। इसके अलावा, टी20 लीग्स की भी भरमार है, जिससे टेस्ट मैचों के लिए जगह नहीं मिल पा रही।
जनवरी में टी20 सीरीज टी20 वर्ल्ड कप को ध्यान में रखते हुए खेली गई थी। इसके बाद टी20 विश्व कप 2026 हुआ और अब आईपीएल और पीएसएल जैसी टी20 लीग खेली जा रही हैं। ऐसे में टेस्ट क्रिकेट को शेड्यूल में पर्याप्त स्थान नहीं मिल रहा।



