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सब्स्टीट्यूट बनकर उतरी जोया, निर्णायक गोल से की भारत की जीत पक्की

नई दिल्ली : जब 14 वर्षीय जोया के वॉली शॉट ने स्टॉपेज टाइम में नेट में जाकर भारत को 14 मार्च को यांगोन में म्यांमार के खिलाफ 3-2 से की जीत दिलाई, तो वह पल उनके लिए हमेशा यादगार बन गया।

भारतीय अंडर-17 महिला राष्ट्रीय टीम के लिए अपने दूसरे ही अंतरराष्ट्रीय मैच में सब्स्टीट्यूट के रूप में मैदान पर उतरकर इस युवा स्ट्राइकर ने निर्णायक गोल दागा और जश्न मनाने के लिए सबसे पहले अपनी मां को फोन किया। वही शख्स जिन्होंने उन्हें सबसे ज्यादा समर्थन दिया। जोया के लिए इस मुकाम तक पहुंचने का सफर उनके गांव की गलियों से शुरू हुआ।

पंजाब के फगवाड़ा में पली-बढ़ी जोया ने मोहल्ले में लड़कों को खेलते देख फुटबॉल उठाई। जोया ने कहा, “शुरुआत में मेरी मां थोड़ी चिंतित थीं। उस समय लड़कियों का फुटबॉल खेलना आम बात नहीं थी। लेकिन बाद में जब उन्हें मेरे खेल के प्रति जुनून का एहसास हुआ, तो उन्होंने मुझे पूरा समर्थन दिया।

मैं अपने कोच हरदीप सिंह का धन्यवाद करना चाहती हूं, जिन्होंने फगवाड़ा में मुझे फुटबॉल की पहली सीख दी, और संदीप सिंह का, जिन्होंने होशियारपुर की शहीद भगत सिंह अकादमी में मुझे ट्रेनिंग दी। उनके मार्गदर्शन के बिना मैं यहां तक नहीं पहुंच पाती।”

प्रतिस्पर्धी फुटबॉल से उनका पहला वास्तविक परिचय 2024 में हुआ, जब उन्होंने अंडर-15 खेलो इंडिया महिला फुटबॉल लीग में हिस्सा लिया। “वह मेरे लिए उस स्तर पर खेलने का पहला अनुभव था,” उन्होंने याद किया। इस टूर्नामेंट ने इस युवा फॉरवर्ड के लिए नए अवसरों के दरवाजे खोल दिए।

इसके बाद उनके प्रदर्शन ने उन्हें इसी साल बेंगलुरु में राष्ट्रीय शिविर के लिए चयन दिलाया। मुख्य कोच पामेला कॉन्टी के मार्गदर्शन में देशभर की प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के साथ प्रशिक्षण उनके लिए एक बड़ा अनुभव साबित हुआ। उन्होंने कहा, “यह मेरा पहला राष्ट्रीय कैंप था और यहां का प्रशिक्षण स्तर काफी ऊंचा था।

एक अनुभवी कोच के साथ काम करना, जिन्होंने विश्व कप में खेला और कोचिंग की है, और देशभर के खिलाड़ियों के साथ ड्रेसिंग रूम साझा करना मेरे लिए बहुत सीखने वाला अनुभव रहा। इससे मुझे अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल की तैयारी और माहौल को समझने का मौका मिला।”

यांगून में वही तैयारी काम आई। जब मैच के अंतिम क्षणों में उन्हें सब्स्टीट्यूट के रूप में मैदान पर उतारा गया, तो उन्होंने कोचिंग स्टाफ के निर्देशों पर ध्यान केंद्रित किया और मौके का पूरा फायदा उठाया। विजयी गोल करना उस पल को और भी खास बना गया।

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