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खिलाड़ियों का कल्याण व विकास खेल नीति का केंद्र होना चाहिए : पी टी उषा

भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष पी टी उषा ने खेल प्रशासन के दृष्टिकोण में खिलाड़ियों को केन्द्र में रखने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि भारत में खेल नीतियां ऐसी होनी चाहिए जो निर्णय लेने की प्रक्रिया में खिलाड़ियों की तैयारी, कल्याण और विकास को सर्वोपरि प्राथमिकता दें।

भारतीय खेल पत्रकार महासंघ के स्वर्ण जयंती समारोह के तीसरे दिन उषा ने कहा कि खेल प्रशासन का लक्ष्य केवल नियम और प्रबंधन नहीं, बल्कि खिलाड़ियों के संपूर्ण विकास पर केंद्रित होना चाहिए।

उन्होंने खेल पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा, “भारतीय खेलों का भविष्य खिलाड़ियों को केंद्र में रखने वाले प्रशासन से तय होना चाहिए। उनकी तैयारी, कल्याण और विकास हमारी सर्वोपरि प्राथमिकता होनी चाहिए।”

उषा ने भारत में खेलों के वर्तमान सफर को एक महत्वपूर्ण मोड़ बताते हुए कहा कि अब खिलाड़ियों के पास बेहतर बुनियादी ढांचा, वैज्ञानिक प्रशिक्षण और मजबूत संस्थागत सहयोग मौजूद है, जिससे वे विश्व स्तर पर आत्मविश्वास के साथ प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं।

साभार : गूगल

उन्होंने आगे कहा, “पिछले एक दशक में खेलों को जिस तरह सहयोग और उत्साहवर्धन मिला है, वह प्रेरणादायक है। यदि हम कोचिंग, ढांचा और प्रतिभा खोज में लगातार निवेश करते रहेंगे तो भारत से विश्वस्तरीय खिलाड़ी लगातार निकलेंगे।”

उन्होंने विशेष रूप से ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में छिपी युवा प्रतिभाओं पर ध्यान देने की आवश्यकता पर बल दिया। उनके अनुसार, भारत की असली खेल शक्ति जमीनी स्तर पर निहित है, और यहां से ही भविष्य के खिलाड़ी उभरेंगे।

सम्मेलन में आईओए सीईओ रघुराम अय्यर ने भी कहा कि भारत खेलों के विकास के एक अहम पड़ाव पर है। बढ़ती आकांक्षाओं, निवेश और भागीदारी के माध्यम से भारत का खेल भविष्य मजबूत बन रहा है। उन्होंने कहा,

“हमें एक ऐसा खेल इकोसिस्टम तैयार करना होगा जिसमें सामुदायिक स्तर पर अधिक से अधिक लोग खेलों में शामिल हों। बेस मजबूत होने पर प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को संसाधन और सहयोग देकर शीर्ष स्तर तक पहुंचाना संभव होगा।”

दिल्ली खेल पत्रकार संघ द्वारा आयोजित एसजेएफआई स्वर्ण जयंती राष्ट्रीय सम्मेलन के तीसरे दिन खेले गए खेल कांक्लेव में खेल प्रशासक, कारपोरेट जगत, प्रसारक और खेल मीडिया के सदस्यों ने मिलकर भारतीय खेलों की भावी दिशा पर महत्वपूर्ण चर्चा की।

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