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स्मरण का दूसरा शतक, राहुल से साझेदारी, कर्नाटक ने कसा शिकंजा

रणजी ट्रॉफी सेमीफाइनल

इकाना स्टेडियम मेंं खेले जा रहे रणजी ट्रॉफी सेमीफाइनल में कर्नाटक ने सिर्फ जीत की ओर कदम नहीं बढ़ाए, बल्कि रणनीतिक परिपक्वता और गहराई का भी शानदार प्रदर्शन किया।

चौथे दिन उत्तराखंड के खिलाफ दूसरी पारी में छह विकेट पर 299 रन बनाकर टीम ने अपनी कुल बढ़त 802 रन तक पहुंचा दी और साथ ही जम्मू और कश्मीर के खिलाफ खिताबी मुकाबले में जगह लगभग सुनिश्चित कर ली।

इस मैच में कर्नाटक की सोच साफ दिखी—सिर्फ मैच जीतना ही नहीं, बल्कि 26 फरवरी से शुरू होने वाले फाइनल से पहले अपनी पूरी बल्लेबाजी इकाई को तैयार करना भी लक्ष्य था।

पहली पारी में उत्तराखंड को 233 रन पर समेटकर 503 रन की भारी बढ़त हासिल करने के बावजूद कर्नाटक ने फॉलोऑन नहीं दिया। इसके बजाय टीम प्रबंधन ने दूसरी पारी को अभ्यास और आत्मविश्वास बढ़ाने के मंच के रूप में इस्तेमाल किया।

रणनीतिक बदलाव के तहत कृथिक कृष्णा और श्रेयस गोपाल जैसे निचले क्रम के बल्लेबाजों को ऊपर भेजा गया। कृष्णा ने 52 रन बनाकर इस मौके का भरपूर फायदा उठाया और दिखाया कि टीम के पास बल्लेबाजी की गहराई कितनी है।

हालांकि असली आकर्षण फिर से रविचंद्रन स्मरण रहे। 22 वर्षीय स्मरण ने लगातार दूसरा शतक जड़ते हुए 149 गेंदों में 12 चौकों और तीन छक्कों की मदद से 127 रन बनाए। पहली पारी में 135 रन बनाकर टीम को 736 तक पहुंचाने वाले स्मरण ने इस पारी में भी जिम्मेदारी संभाली।

जब कर्नाटक का स्कोर चार विकेट पर 122 रन था और बढ़त 600 के पार पहुंच चुकी थी, तब उन्होंने केएल राहुल (नाबाद 70, 67 गेंद) के साथ पांचवें विकेट के लिए 168 रन की साझेदारी कर मैच पर पूरी तरह से शिकंजा कस दिया।

उत्तराखंड ने दिन की शुरुआत पांच विकेट पर 149 रन से की थी, लेकिन तेज गेंदबाज विशाख विजयकुमार ने पहले ही ओवर में सौरभ रावत को 14 रन पर आउट कर बढ़त की नींव और मजबूत कर दी। विजयकुमार ने लक्ष्य रायचंदानी को भी पवेलियन भेजा।

हालांकि नौ विकेट पर 175 रन की स्थिति में आदित्य रावत ने 38 गेंदों पर नाबाद 45 रन बनाकर टीम का स्कोर 200 के पार पहुंचाया, लेकिन तब तक मैच कर्नाटक की पकड़ में जा चुका था। कर्नाटक के लिए विजयकुमार और विद्याधर पाटिल ने तीन-तीन विकेट लेकर गेंदबाजी आक्रमण की धार दिखाई।

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