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सिंगापुर और उत्तर प्रदेश में बढ़ेगी साझेदारी, योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में सिंगापुर के 14 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल से की मुलाकात

Poonam Kumari
October 29, 2026
4 min read
सिंगापुर और उत्तर प्रदेश में बढ़ेगी साझेदारी,  योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में सिंगापुर के 14 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल से की मुलाकात

लखनऊ ( राघवेंद्र प्रताप सिंह) : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कल लखनऊ में सिंगापुर के उद्योगपतियों और निवेशकों के 14 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। सिंगापुर बिजनेस फेडरेशन के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल ने लॉजिस्टिक्स, सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर, हरित ऊर्जा, शहरी विकास और होटल उद्योग में निवेश में रुचि दिखाई। यह प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री की फरवरी में सिंगापुर यात्रा के बाद आया है।

मुख्यमंत्री योगी ने जेवर स्थित नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास ‘सिंगापुर सिटी’ और आधुनिक औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने का प्रस्ताव दिया। उन्होंने कहा कि बेहतर सड़क और रेल संपर्क के कारण यह क्षेत्र व्यापार और सामान की ढुलाई का बड़ा केंद्र बन सकता है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश रक्षा औद्योगिक गलियारे के छह केंद्रों के लिए 35 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। ये केंद्र लखनऊ, कानपुर, झांसी, आगरा, अलीगढ़ और चित्रकूट में हैं।

उत्तर प्रदेश का बढ़ता ग्लोबल इंगेजमेंट :

मुख्य रूप से सिंगापुर, जापान, रूस, वियतनाम, जर्मनी और बेल्जियम जैसे प्रमुख वैश्विक देशों के साथ उत्तर Pradesh (UP) के आर्थिक और रणनीतिक संबंध तेज़ी से मजबूत हो रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य को $1 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य के तहत इन देशों के साथ निवेश, व्यापार और तकनीकी सहयोग को बड़े स्तर पर बढ़ावा दिया जा रहा है।

दुनिया के जिन प्रमुख देशों के साथ उत्तर प्रदेश के संबंध और व्यापारिक रिश्ते सबसे मजबूत हो रहे हैं, वे इस प्रकार हैं:

सिंगापुर (Singapore) ke साथ रणनीतिक साझेदारी :

सिंगापुर और उत्तर प्रदेश के बीच संबंध हाल के दिनों में सबसे अधिक मजबूत हुए हैं। राज्य को सिंगापुर से लगभग ₹20,000 करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। इसके मुख्य क्षेत्र हैं : बुनियादी ढांचा (Infrastructure), डेटा सेंटर, लॉजिस्टिक्स, ग्रीन एनर्जी, सेमीकंडक्टर और इनलैंड वॉटरवेज।

विशेष परियोजना: नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) के पास एक हाई-टेक 'सिंगापुर सिटी' और औद्योगिक टाउनशिप विकसित करने का प्रस्ताव है।

जापान के साथ उत्तर प्रदेश के मजबूत होते रिश्ते :

जापान लंबे समय से उत्तर प्रदेश का एक प्रमुख सहयोगी रहा है और 'यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट' के जरिए यह रिश्ते और गहरे हुए हैं। विशेष परियोजना की बात करें तो ग्रेटर नोएडा (YEIDA क्षेत्र) में लगभग 500 एकड़ में 'जापानी सिटी' (Japanese City) विकसित की जा रही है, जो जापानी कंपनियों के लिए एक एकीकृत इकोसिस्टम बनेगी।

सहयोग के मुख्य क्षेत्रों में शामिल है : ग्रीन हाइड्रोजन, नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy), ऑटोमोबाइल और तकनीकी सहयोग।

रूस और बेलारूस के साथ यूपी के संबंध :

औद्योगिक साझेदारी: उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो और द्विपक्षीय वार्ताओं के माध्यम से इन दोनों देशों के साथ रिश्ते मजबूत हुए हैं।

मुख्य क्षेत्र: रूस के साथ डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग (जैसे लखनऊ में ब्रह्मोस मिसाइल निर्माण और अमेठी में AK-203 राइफल उत्पादन), फार्मास्यूटिकल्स और कृषि के क्षेत्र में गहरी साझेदारी है।

भारी मशीनरी: बेलारूस के साथ भारी मशीनरी, ट्रैक्टर निर्माण और लकड़ी प्रसंस्करण (Wood-processing) जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया जा रहा है।

जर्मनी, बेल्जियम और पोलैंड और यूपी

यूरोपीय निवेश: इन यूरोपीय देशों से उत्तर प्रदेश को भारी मात्रा में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) और निवेश के प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।

मुख्य क्षेत्र: रक्षा गलियारा (Defence Corridor), सस्टेनेबल टेक्नोलॉजी, मैन्युफैक्चरिंग और ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट्स।

वियतनाम और मलेशिया और यूपी के रिश्ते

MSME और निर्यात: उत्तर प्रदेश देश के पारंपरिक उद्योगों (ODOP) और आधुनिक औद्योगिक उत्पादों के लिए दक्षिण-पूर्व एशिया के ये देश बड़े बाजार बनकर उभरे हैं।

मुख्य क्षेत्र: खाद्य प्रसंस्करण (Food Processing), मशीनरी, इलेक्ट्रिकल उपकरण और चमड़े के उत्पाद (Leather Goods)।

उत्तर प्रदेश का व्यापार BRICS समूह के देशों (जैसे ब्राजील, रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, यूएई, सऊदी अरब आदि) के साथ अत्यधिक मजबूत हुआ है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार, यूपी ने ब्रिक्स और इसके सहयोगी देशों को $5.36 बिलियन (लगभग ₹47,484 करोड़) से अधिक का निर्यात किया है, जिसमें मशीनरी, रेडीमेड गारमेंट्स, कालीन और रत्न शामिल हैं।

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लागू की गई ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCC) पॉलिसी और समर्पित FDI नीति (जिसमें भूमि सब्सिडी और स्टांप ड्यूटी में छूट शामिल है) के कारण दुनिया भर की बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियां (जैसे माइक्रोसॉफ्ट, एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स) राज्य में अपने पैर पसार रही हैं, जिससे उत्तर प्रदेश का वैश्विक स्तर पर एक मजबूत औद्योगिक रिश्ता कायम हो रहा है।

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