पोलैंड का भारत की ओर रुख: चीन के साथ रणनीतिक साझेदारी में दरार, अब दिल्ली पर बढ़ा भरोसा; व्यापार और रक्षा सहयोग पर जोर

विवेक ओझा
वारसॉ/नई दिल्ली: यूरोपीय देश पोलैंड ने अपनी विदेश नीति में एक बड़ा बदलाव करते हुए भारत के साथ संबंधों को और मजबूत करने का फैसला किया है। पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क की हालिया भारत यात्रा के बाद यह साफ हो गया है कि वारसॉ अब चीन के साथ अपनी 'रणनीतिक साझेदारी' को लेकर लगातार मोहभंग का शिकार हो रहा है, और इसीलिए वह भारत को एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में देख रहा है।
चीन से रिश्तों में आई दरार
रिपोर्टों के मुताबिक, पोलैंड का चीन के प्रति रुख पिछले कुछ समय से कड़वा होता जा रहा है। इसकी दो बड़ी वजहें हैं—चीन के साथ बढ़ता व्यापार घाटा और यूक्रेन युद्ध में रूस के प्रति बीजिंग का समर्थन। पोलैंड को लगता है कि चीन के साथ उसकी 'रणनीतिक साझेदारी' अब केवल कागजी बनकर रह गई है, जिसका असर उसकी अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर पड़ रहा है। ऐसे में वारसॉ अपनी साझेदारियों को विविधतापूर्ण बनाने की कोशिश में जुटा है।
भारत-पोलैंड रणनीतिक साझेदारी को मिली नई ऊर्जा
यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2024 में पोलैंड का ऐतिहासिक दौरा किया था, जो 45 सालों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री का पहला दौरा था और तब द्विपक्षीय संबंधों को 'रणनीतिक साझेदारी' का दर्जा मिला था। अब 16 साल बाद पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने भारत का दौरा कर इस साझेदारी को नई गति दी है। दोनों नेताओं ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को मौजूदा 6 अरब डॉलर से दोगुना करने का लक्ष्य तय किया है।
किन क्षेत्रों में होगा सहयोग?
दोनों देशों ने रक्षा, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है। इसके अलावा, रक्षा उद्योग संवाद स्थापित करने और आतंकवाद-रोधी सहयोग पर भी चर्चा हुई है। पोलैंड ने भारत को इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव (IPOI) में शामिल होने का न्यौता भी दिया है। भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के जल्द लागू होने से भी दोनों देशों के व्यापार को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है।
रूस और पाकिस्तान से जुड़ी चुनौतियां
हालांकि, इस बढ़ते सहयोग के बीच कुछ चुनौतियां भी हैं। भारत का रूस के साथ पुराना रक्षा संबंध है, जबकि पोलैंड के पाकिस्तान के साथ रक्षा संबंध रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि दोनों देशों को एक-दूसरे की संवेदनाओं का सम्मान करते हुए भरोसे का माहौल बनाना होगा, तभी यह साझेदारी लंबे समय तक टिक पाएगी।
कुल मिलाकर, पोलैंड का भारत की ओर झुकाव यूरोप में भारत की बढ़ती रणनीतिक अहमियत को दर्शाता है और यह साझेदारी आने वाले समय में वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं और सुरक्षा समीकरणों को नया आकार दे सकती है।
