भारतीय प्राणी विज्ञान सर्वेक्षण और घाना विश्वविद्यालय के बीच अहम समझौता
कोलकाता : भारत और अफ्रीकी देशों के बीच वैज्ञानिक एवं संस्थागत सहयोग को मजबूत करने की दिशा में भारतीय प्राणी विज्ञान सर्वेक्षण (जेडएसआई) और घाना विश्वविद्यालय के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) का आदान-प्रदान हुआ। यह कार्यक्रम…

कोलकाता : भारत और अफ्रीकी देशों के बीच वैज्ञानिक एवं संस्थागत सहयोग को मजबूत करने की दिशा में भारतीय प्राणी विज्ञान सर्वेक्षण (जेडएसआई) और घाना विश्वविद्यालय के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) का आदान-प्रदान हुआ। यह कार्यक्रम छह अक्टूबर को घाना की राजधानी अक्रा स्थित विदेश मंत्रालय में आयोजित किया गया। समझौते के जरिए जैव विविधता संरक्षण, वन्यजीव स्वास्थ्य, बीमारी निगरानी और संरक्षण जीनोमिक्स जैसे क्षेत्रों में दोनों संस्थानों के बीच सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। जेडएसआई की और से गुरुवार को इस बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है।एमओयू का आदान-प्रदान भारत के विदेश मंत्रालय के मध्य एवं पश्चिम अफ्रीका प्रभाग के अतिरिक्त सचिव सेवाला नाइक मुडे और घाना विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ बायोलॉजिकल साइंसेज के डीन प्रो. फ्रांसिस गबोग्बो ने किया। इस अवसर पर भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर, घाना के विदेश मंत्री सैमुअल ओकुडजेटो अब्बलाक्वा और शिक्षा मंत्री हारुना इदरिसु भी उपस्थित रहे।जेडएसआई के अनुसार, यह समझौता शिक्षा, वैज्ञानिक अनुसंधान और क्षमता निर्माण के लिए व्यापक संस्थागत ढांचा तैयार करेगा। इसके तहत ‘वन हेल्थ’ और बीमारी निगरानी, जैव विविधता की निगरानी, संरक्षण जीनोमिक्स तथा जैव विविधता प्रबंधन के लिए आधुनिक जीनोमिक तकनीकों के इस्तेमाल जैसे क्षेत्रों में संयुक्त कार्य की संभावनाएं तलाश की जाएंगी।जेडएसआई की निदेशक डॉ. धृति बनर्जी और वैज्ञानिक (डी) डॉ. मुकेश ठाकुर इस दौरान वैज्ञानिक सहयोग की संभावनाओं को आगे बढ़ाने के लिए घाना के दौरे पर थे। डॉ. बनर्जी ने घाना के शिक्षाविदों और वैज्ञानिकों के साथ संवाद में भारत और घाना के बीच दीर्घकालिक संस्थागत साझेदारी विकसित करने की दिशा में विचार साझा किए।उन्होंने जैव विविधता संरक्षण, वन्यजीव स्वास्थ्य और पर्यावरणीय स्थिरता से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए संयुक्त शोध कार्यक्रम विकसित करने तथा युवा शोधकर्ताओं के आदान-प्रदान पर जोर दिया। इससे दोनों देशों के वैज्ञानिकों के बीच ज्ञान और विशेषज्ञता साझा करने के साथ अनुसंधान क्षमता को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।जेडएसआई ने बताया कि संस्थान पिछले तीन वर्षों से घाना में जैव विविधता अनुसंधान से जुड़ा हुआ है। इनमें डॉ. मुकेश ठाकुर के नेतृत्व में पैंगोलिन संरक्षण से संबंधित परियोजना भी शामिल है। नए एमओयू से इस तरह की वैज्ञानिक गतिविधियों को व्यापक संस्थागत आधार मिलने की संभावना है।समझौते के तहत जेडएसआई और घाना विश्वविद्यालय अपनी वैज्ञानिक विशेषज्ञता एवं संस्थागत क्षमताओं को साझा कर संयुक्त अनुसंधान, क्षमता निर्माण और प्राकृतिक संसाधनों के सतत प्रबंधन से जुड़े कार्यक्रमों को आगे बढ़ाएंगे। कार्यक्रम में घाना में भारत के उच्चायुक्त सुरिंदर भगत सहित भारतीय मिशन और घाना विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
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