बिहार में 417 KM सड़क पर खर्च होंगे ₹28,302 करोड़, 8 जिलों को होगा सीधा फायदा
विवेक ओझा पटना: बिहार में सड़क कनेक्टिविटी को नई रफ्तार देने की तैयारी है। केंद्र सरकार ने गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे के बिहार वाले हिस्से के निर्माण पर करीब 28,302 करोड़ रुपये खर्च करने का अनुमान जताया है। इस…

विवेक ओझा
पटना: बिहार में सड़क कनेक्टिविटी को नई रफ्तार देने की तैयारी है। केंद्र सरकार ने गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे के बिहार वाले हिस्से के निर्माण पर करीब 28,302 करोड़ रुपये खर्च करने का अनुमान जताया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का लगभग 417 किलोमीटर हिस्सा बिहार से होकर गुजरेगा, जिससे राज्य के आठ जिलों को बेहतर सड़क संपर्क का सीधा लाभ मिलेगा।
एक्सप्रेसवे का रूट और कनेक्टिविटी
गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई करीब 568 किलोमीटर बताई गई है, जिसमें से लगभग 417 किलोमीटर हिस्सा बिहार में होगा। यह एक्सप्रेसवे बिहार के पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, शिवहर, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज से होकर गुजरेगा। इसके बनने से इन जिलों के बीच आवागमन बेहतर होगा और उत्तर प्रदेश, बिहार तथा पश्चिम बंगाल के बीच सड़क संपर्क भी मजबूत होगा। पूर्वोत्तर भारत की ओर जाने वाले यातायात के लिए भी यह मार्ग महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
₹1.64 लाख करोड़ की सड़क परियोजनाओं को मंजूरी
गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे के अलावा, केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 की वार्षिक कार्ययोजना के तहत बिहार में कुल 32 सड़क परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इनकी कुल लंबाई लगभग 2,424 किलोमीटर है और अनुमानित लागत करीब 1,64,518 करोड़ रुपये है।
इनमें राष्ट्रीय राजमार्ग प्रभाग और बिहार के पथ निर्माण विभाग की 18 परियोजनाएं शामिल हैं, जिनकी लंबाई करीब 739 किलोमीटर और लागत 24,940 करोड़ रुपये है। वहीं, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की 14 परियोजनाओं की लंबाई लगभग 1,685 किलोमीटर है, जिन पर करीब 1,39,578 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इन योजनाओं में हाईवे का चौड़ीकरण, सड़क सुदृढ़ीकरण, नए बाईपास और रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण शामिल है।
अन्य प्रमुख परियोजनाएं
स्वीकृत सूची में रक्सौल-हल्दिया, बक्सर-भागलपुर और मुजफ्फरपुर-बरौनी जैसे महत्वपूर्ण मार्ग भी शामिल हैं। इसके अलावा छपरा-रेवाघाट-मुजफ्फरपुर सड़क और पटना नॉर्दर्न रिंग रोड से जुड़ी परियोजनाओं को भी कार्ययोजना में जगह मिली है।
धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए राम जानकी पथ परियोजना के तीसरे और चौथे पैकेज को भी मंजूरी दी गई है। इन दोनों हिस्सों के निर्माण पर करीब 8,600 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार पर असर
इन सड़क परियोजनाओं के पूरा होने से यात्रा का समय कम होगा, माल परिवहन सुगम होगा और प्रमुख आर्थिक केंद्रों को जोड़ने में मदद मिलेगी। बेहतर कनेक्टिविटी से सीमांचल, कोसी और चंपारण जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ने, उद्योगों को बढ़ावा मिलने और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। कृषि उत्पादों की ढुलाई भी आसान होगी। पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल के अनुसार, इन परियोजनाओं से राज्य की परिवहन व्यवस्था मजबूत होगी।
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