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प्रसिद्ध वैज्ञानिक और शिक्षाविद आचार्य प्रफुल्ल चंद्र राय की आज 166वीं जयंती

नई दिल्ली ( राघवेंद्र प्रताप सिंह) : भारत की पहली दवा कंपनी बंगाल केमिकल्स एंड फार्मास्युटिकल्स के संस्थापक, प्रसिद्ध वैज्ञानिक और शिक्षाविद आचार्य प्रफुल्ल चंद्र राय की 166वीं जयंती आज मनाई जा रही है। उनका जन्म 2 अगस्त…

Ragwendra P Singh
August 2, 2026
2 min read
प्रसिद्ध वैज्ञानिक और शिक्षाविद आचार्य प्रफुल्ल चंद्र राय की आज 166वीं जयंती

नई दिल्ली ( राघवेंद्र प्रताप सिंह) : भारत की पहली दवा कंपनी बंगाल केमिकल्स एंड फार्मास्युटिकल्स के संस्थापक, प्रसिद्ध वैज्ञानिक और शिक्षाविद आचार्य प्रफुल्ल चंद्र राय की 166वीं जयंती आज मनाई जा रही है। उनका जन्म 2 अगस्त 1861 को वर्तमान बांग्लादेश के खुलना में हुआ था।

आचार्य राय को भारत में आधुनिक रसायन विज्ञान का जनक माना जाता है। उन्होंने देश में वैज्ञानिक शिक्षा को बढ़ावा दिया और रसायन विज्ञान में भारत के पहले आधुनिक शोध संस्थान की स्थापना की। उन्होंने मरक्यूरस नाइट्राइट की खोज की और “ए हिस्ट्री ऑफ हिंदू केमिस्ट्री” नामक पुस्तक लिखी।

वे आत्मनिर्भर भारत के विचार के समर्थक थे और उन्होंने सहकारी बैंकिंग, ग्रामीण विकास और युवाओं के रोजगार को बढ़ावा दिया। उन्होंने सत्येंद्रनाथ बोस और मेघनाद साहा जैसे वैज्ञानिकों का मार्गदर्शन भी किया। उनके योगदान आज भी देश को प्रेरित करते हैं।

दादा दीवान और पिता जमींदार

प्रफुल्ल चंद्र राय का जन्म 2 अगस्त 1861 में बंगाल प्रेसीडेंसी के खुलना जिले के रारुली-कातिपारा गांव में हुआ था।  अभी ये इलाका बांग्लादेश में है। उनके दादा दीवान और पिता हरिश्चंद्र राय जमींदार और फारसी, अंग्रेजी और संस्कृत जैसी भाषाओं के विद्वान थे। राय का परिवार 1870 में उनका कलकत्ता आया जहां, मॉडर्न एजुकेशन के हेयर स्कूल में उनकी पढ़ाई हुई. लेकिन पेचिश के कारण उन्हें पढ़ाई बीच में छोड़नी पड़ी लेकिन बेहद होनहार राय ने घर पर ही अंग्रेजी, लैटिन, ग्रीक, संस्कृत और इतिहास का गहन अध्ययन कर विशेषज्ञता हासिल की।

प्रेसिडेंसी कॉलेज कलकत्ता से पढ़ाई में उन्होंने रसायन विज्ञान में ऐसी छाप छोड़ी की उन्हें 1882 में उच्च शिक्षा के लिए स्कॉटलैंड की एडिनबर्ग यूनिवर्सिटी में स्कॉलरशिप से दाखिला मिला। राय ने 1886 में एडिनबर्ग से बीएससी और और 1887 में डीएससी की डिग्री ली. उनके रिसर्च पेपर ने ब्रिटेन के साथ पूरी दुनिया में तहलका मचाया।

 

प्रेसीडेंसी कॉलेज कोलकाता की लैब में 1896 मे प्रफुल्ल चंद्र राय मरकरी और नाइट्रिक एसिड मिलाकर कुछ नया बनाने की कोशिश में थे.उन्हें परखनली के पेंदे में पीले रंग के खूबसूरत क्रिस्टल तैरते दिखे.जांच में ये मर्क्यूरस नाइट्राइट निकला. उस समय तक पूरी दुनिया का कोई वैज्ञानिक स्थिर रूप में इसकी खोज नहीं कर पाया था.इस खोज ने उनका डंका पूरी दुनिया में बजने लगा. उन्होंने पारे (Mercury) और सल्फर के कई कंपाउंड पर रिसर्च किए.एमाइन नाइट्राइट्स सीरीज के गहन अध्ययन के साथ 150 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित किए।

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