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Sambhal Violence: कड़ी सुरक्षा के बीच न्यायिक आयोग ने किया हिंसा प्रभावित इलाके का दौरा

बीएस राय/ लखनऊ। उत्तर प्रदेश के संभल जिले में पिछले दिनों हुई हिंसा की जांच के लिए गठित न्यायिक आयोग के सदस्यों ने रविवार को यहां शाही जामा मस्जिद और अन्य इलाकों का दौरा किया, जहां मुगलकालीन मस्जिद के न्यायालय द्वारा आदेशित सर्वेक्षण को लेकर हिंसा हुई थी।

पैनल प्रमुख सेवानिवृत्त इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश देवेंद्र कुमार अरोड़ा और सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी अरविंद कुमार जैन तीन सदस्यीय आयोग के दो सदस्य थे, जिन्होंने 24 नवंबर को हिंसा वाले इलाकों का दौरा किया। पैनल के तीसरे सदस्य पूर्व आईएएस अधिकारी अमित मोहन प्रसाद रविवार के दौरे के दौरान मौजूद नहीं थे।

हालांकि, आयोग के सदस्यों ने सुबह के दौरे के दौरान मीडिया के किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया। उनके साथ मुरादाबाद के मंडलायुक्त आंजनेय कुमार सिंह, डीआईजी मुनिराज जी के साथ संभल के जिला मजिस्ट्रेट राजेंद्र पेंसिया और पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार भी थे।

मंडलायुक्त ने शनिवार को बताया कि अरोड़ा और जैन एक दिन पहले ही मुरादाबाद पहुंच गए थे, जबकि प्रसाद के संभल में उनके साथ शामिल होने की उम्मीद है। शाही जामा मस्जिद के न्यायालय द्वारा आदेशित सर्वेक्षण के दौरान 24 नवंबर को संभल में हिंसा भड़क उठी, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए।

यह सर्वेक्षण एक याचिका से जुड़ा था, जिसमें दावा किया गया था कि मस्जिद के स्थल पर कभी हरिहर मंदिर हुआ करता था। 28 नवंबर को एक अधिसूचना के माध्यम से गठित आयोग को दो महीने के भीतर अपनी जांच पूरी करने का निर्देश दिया गया है। इस समय सीमा को बढ़ाने के लिए सरकार की मंजूरी की आवश्यकता होगी।

इस पैनल को यह जांच करने का काम सौंपा गया है कि क्या झड़पें स्वतःस्फूर्त थीं या किसी सुनियोजित आपराधिक साजिश का हिस्सा थीं, साथ ही स्थिति से निपटने में पुलिस और प्रशासन की तैयारियों की भी जांच की जाएगी। आयोग हिंसा के लिए जिम्मेदार परिस्थितियों का भी विश्लेषण करेगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए उपाय सुझाएगा।

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