संभल हिंसा: संभल में तनावपूर्ण माहौल, हर गली चौराहे पर पुलिस बल तैनात, जानिए क्यों भड़की हिंसा?

बीएस राय/ Sambhal Voilence: उत्तर प्रदेश के संभल में जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान भड़की हिंसा में तीन लोगों की मौत हो गई। प्रशासन ने इलाके में कर्फ्यू लगा दिया है और इंटरनेट बंद कर दिया है। 15 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस का कहना है कि सर्वे टीम ने वीडियोग्राफी पूरी कर ली है, जिसकी रिपोर्ट 29 नवंबर को पेश की जाएगी।
उत्तर प्रदेश के संभल जिले में जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान भड़की हिंसा ने हालात को तनावपूर्ण बना दिया है। इस घटना में तीन युवकों की मौत हो गई है, जबकि पुलिस और स्थानीय लोगों के बीच झड़प में कई लोग घायल हो गए हैं। हिंसा के बाद इलाके में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं और भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है।
दरअसल शनिवार सुबह कोर्ट के आदेश पर सर्वे करने पहुंची टीम का स्थानीय लोगों ने जमकर विरोध किया। एडवोकेट कमिश्नर और उनकी टीम जैसे ही मस्जिद पहुंची, करीब 300 लोगों की भीड़ ने पथराव शुरू कर दिया। हालात इतने बिगड़ गए कि पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने पड़े। इस हिंसा में एसपी समेत कई पुलिसकर्मी घायल हुए हैं।
हिंसा में तीन की मौत हिंसा में नईम खान, बिलाल और नोमान नाम के तीन युवकों की मौत हो गई। मृतकों के परिजनों ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने गोली चलाई, जिससे उनकी मौत हो गई। हालांकि पुलिस ने इस आरोप को खारिज करते हुए दावा किया कि उन्होंने कोई गोली नहीं चलाई। लोग घर छोड़कर जाने लगे जामा मस्जिद के आसपास रहने वाले लोग डर के माहौल में घर छोड़कर जाने लगे हैं। महिलाएं और बच्चे अपना सामान समेटकर इलाके से निकलते नजर आए।
मस्जिद या मंदिर? संभल में यह विवाद हिंदू पक्ष के दावे से शुरू हुआ, जिसमें कहा गया था कि यह मस्जिद एक प्राचीन हिंदू मंदिर के स्थान पर बनाई गई थी। इस दावे की जांच के लिए कोर्ट ने मस्जिद का सर्वे करने का आदेश दिया था। एडवोकेट कमिश्नर विष्णु शंकर जैन ने बताया कि मस्जिद के अंदर सर्वे और वीडियोग्राफी पूरी हो चुकी है। अब 29 नवंबर को कोर्ट में रिपोर्ट पेश की जाएगी।
एडवोकेट विष्णु शंकर जैन ने इस हिंसा को सुनियोजित साजिश बताया। उन्होंने कहा कि सर्वे टीम को डराने और जांच रोकने के लिए यह हमला किया गया। जैन ने आरोप लगाया कि यह नेताओं के भड़काऊ बयानों का नतीजा है, जिसका मकसद सच को सामने आने से रोकना है।
हिंसा और आगजनी के बाद पुलिस ने दो महिलाओं समेत 15 लोगों को हिरासत में लिया है। इलाके को पूरी तरह से सील कर दिया गया है और पुलिस की टीमें संदिग्धों की पहचान के लिए वीडियो फुटेज की जांच कर रही हैं।
तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए संभल में इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी गई हैं। पुलिस हर गली और चौराहे पर गश्त कर रही है। अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन के अनुसार जामा मस्जिद पर पूजा स्थल अधिनियम लागू नहीं होता। उन्होंने कहा कि इमारत भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की संरक्षित सूची में है, और ऐसे मामलों में अधिनियम लागू नहीं होता।
हिंसा के बावजूद सर्वेक्षण टीम ने अपना काम पूरा कर लिया है। अब आगे की कार्रवाई रिपोर्ट कोर्ट में पेश होने के बाद ही स्पष्ट होगी। इस घटना ने संभल के माहौल को तनावपूर्ण बना दिया है, और शांति बहाल करना प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।संभल में हुई यह घटना धार्मिक विवादों और संवेदनशील मुद्दों के बीच शांति बनाए रखने की जरूरत को रेखांकित करती है। यह समय प्रशासन और समाज के लिए सावधानी और समझदारी से काम लेने का है, ताकि टकराव के बजाय आपसी समाधान को प्राथमिकता दी जा सके।



