राहुल गांधी का केंद्र पर प्रहार: पीएम आवास तक प्रदर्शन मार्च निकालने की कोशिश कर रहे राहुल गांधी और कांग्रेस सांसदों को दिल्ली पुलिस ने लिया हिरासत में

राघवेंद्र प्रताप सिंह/ नई दिल्ली: नीट-यूजी (NEET-UG) पेपर लीक विवाद और जंतर-मंतर पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के छात्रों पर हुई पुलिसिया कार्रवाई के विरोध में संसद भवन से शुरू हुआ राजनीतिक संग्राम अब सड़कों पर पूरी तरह से भड़क उठा है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस के दर्जनों सांसदों ने गुरुवार को संसद परिसर से सीधे प्रधानमंत्री आवास (7, लोक कल्याण मार्ग) की ओर एक पैदल विरोध मार्च निकालने का प्रयास किया। हालांकि, सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी और कई अन्य सांसदों को बीच रास्ते में ही हिरासत में ले लिया।
संसद से पीएम आवास तक हाई-वोल्टेज ड्रामा
दोपहर लगभग 1:30 बजे, जैसे ही संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही हंगामे के कारण स्थगित हुई, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, और कांग्रेस के अन्य वरिष्ठ सांसद हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर विजय चौक की ओर बढ़ने लगे। सांसदों के बैनरों पर “युवाओं को न्याय दो”, “पेपर लीक की जांच कराओ” और “शिक्षा मंत्री इस्तीफा दो” के नारे लिखे हुए थे। सांसदों का इरादा सीधे प्रधानमंत्री आवास पहुंचकर उनसे मुलाकात करने और छात्रों की मांगें सौंपने का था।
बैरिकेडिंग और पुलिस की सख्त कार्रवाई
दिल्ली पुलिस ने पहले से ही रायसीना हिल और मोतीलाल नेहरू मार्ग जाने वाले सभी रास्तों पर भारी बैरिकेडिंग कर रखी थी और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की तैनाती की थी। जब सांसदों ने बैरिकेड्स लांघने का प्रयास किया, तो पुलिस के साथ उनकी तीखी बहस और धक्का-मुक्की हुई। स्थिति को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी, केसी वेणुगोपाल, और दीपेंद्र हुड्डा सहित लगभग 20 सांसदों को हिरासत में ले लिया और उन्हें बसों में बैठाकर मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन ले गई।
‘हम युवाओं की आवाज दबने नहीं देंगे’
पुलिस की बस में से मीडिया से बात करते हुए राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री देश के लाखों युवाओं के भविष्य को तबाह होते देख रहे हैं, लेकिन उनके पास छात्रों से मिलने का पांच मिनट का समय नहीं है। जब हम शांतिपूर्ण तरीके से सवाल पूछते हैं, तो हमें हिरासत में ले लिया जाता है। यह तानाशाही का चरम है, लेकिन कांग्रेस पार्टी देश के छात्रों और युवाओं के अधिकारों की लड़ाई से एक कदम भी पीछे नहीं हटेगी।”
देर शाम सभी सांसदों को रिहा कर दिया गया, लेकिन इस घटनाक्रम ने मानसून सत्र के बाकी बचे दिनों के लिए सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक कड़वाहट को और अधिक गहरा कर दिया है।



