छात्र आंदोलन पर कांग्रेस-आप में रार, सपा की बढ़ी टेंशन; अखिलेश यादव बोले- ‘परेशानी है तालमेल बनाना’

विवेक ओझा: देशभर में उठ रहे छात्र आंदोलनों के मुद्दे पर विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ (INDIA) के भीतर की दरारें अब खुलकर सामने आने लगी हैं। परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और छात्रों के अधिकारों को लेकर चल रहे देशव्यापी आंदोलन ने राजनीतिक रंग ले लिया है। लेकिन सरकार को घेरने की बजाय, गठबंधन के दो प्रमुख दल—कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (AAP)—आपस में ही उलझते हुए नजर आ रहे हैं। इस खींचतान ने गठबंधन के एक अन्य महत्वपूर्ण सहयोगी, समाजवादी पार्टी (सपा) की चिंताएं काफी बढ़ा दी हैं।
सूत्रों के मुताबिक, छात्र आंदोलन की अगुवाई और इसका श्रेय लेने की होड़ में कांग्रेस और आप के बीच जमीनी स्तर पर तीखी बहस देखने को मिली है। हाल ही में एक संयुक्त प्रदर्शन के दौरान दोनों दलों के कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच मंच साझा करने और नारों को लेकर असहमति पैदा हो गई। दिल्ली, पंजाब और हरियाणा में पहले से ही दोनों पार्टियों के बीच स्थानीय स्तर पर राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई चल रही है, और अब यह विवाद राष्ट्रीय मुद्दों पर भी उनका रास्ता रोक रहा है।
सहयोगियों के बीच हो रही इस बयानबाजी और तनातनी का सीधा असर उत्तर प्रदेश की राजनीति और समाजवादी पार्टी की रणनीतियों पर पड़ रहा है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव, जो इंडिया गठबंधन को मजबूत करने की लगातार वकालत करते रहे हैं, ने इस विवाद पर गहरी चिंता व्यक्त की है। मीडिया से बातचीत के दौरान अखिलेश यादव ने गठबंधन के भीतर की इस कलह पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कहा, “परेशानी है तालमेल बनाना।”
अखिलेश यादव का यह बयान इस बात का स्पष्ट संकेत है कि राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का मुकाबला करने के लिए बने इस गठबंधन में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने जल्द ही अपने आपसी मतभेदों को नहीं सुलझाया, तो इसका सीधा नुकसान आगामी चुनावों में पूरे गठबंधन को उठाना पड़ सकता है। छात्रों का मुद्दा एक बेहद संवेदनशील और बड़ा वोट बैंक है; यदि विपक्ष एकजुट होकर इस मुद्दे को नहीं उठा पाता है, तो यह गठबंधन की राजनीतिक परिपक्वता पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करेगा।



