कोयला खदानों के पानी को पीने योग्य बनाने के लिए ‘कोल नीर’ (Coal NEER) संयंत्रों का उद्घाटन आज दिल्ली में किया जाएगा

पल्लवी श्रीवास्तव / नई दिल्ली: जल संरक्षण और कोयला खनन क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की दिशा में एक अभूतपूर्व पहल करते हुए केंद्रीय कोयला मंत्रालय आज नई दिल्ली से ‘कोल नीर’ (Coal NEER) परियोजना का आधिकारिक उद्घाटन करने जा रहा है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत कोयला खदानों से निकलने वाले गंदे और गाद भरे पानी को आधुनिक शोधन तकनीकों (RO and Filtration Plants) के माध्यम से संसाधित करके उच्च गुणवत्ता वाले पीने के पानी और सिंचाई के पानी में बदला जाएगा।
खदान के पानी का सदुपयोग
कोयला निष्कर्षण (Coal Extraction) की प्रक्रिया के दौरान खदानों से प्रतिदिन लाखों गैलन पानी बाहर निकाला जाता है, जो अब तक व्यर्थ बह जाता था या आसपास के जल निकायों को दूषित करता था। ‘कोल नीर’ संयंत्रों की स्थापना के बाद, इस पानी को उन्नत रिवर्स ऑस्मोसिस (RO), अल्ट्रा-फिल्ट्रेशन और मिनरलाइजेशन प्रक्रियाओं से गुजारा जाएगा, जिससे यह पानी ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) के पेयजल मानकों के पूरी तरह अनुकूल बन जाएगा।
ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों को सीधा लाभ
इस परियोजना का सीधा लाभ झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल के उन दूरदराज के ग्रामीण और जनजातीय इलाकों को मिलेगा जो कोयला खदानों के आसपास बसे हैं और जहां पीने के पानी की भारी किल्लत रहती है। ‘कोल नीर’ के माध्यम से इन गांवों में पाइपलाइनों और वाटर एटीएम के जरिए नाममात्र की कीमत पर या मुफ्त में शुद्ध पेयजल सप्लाई किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, इस पानी का उपयोग आसपास के खेतों में सिंचाई के लिए भी किया जाएगा, जिससे स्थानीय किसानों की फसल उपज बढ़ेगी।
सस्टेनेबल माइनिंग का उदाहरण
कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) द्वारा संचालित यह पहल सर्कुलर इकॉनमी (Circular Economy) का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जहां औद्योगिक अपशिष्ट (Waste) को एक मूल्यवान संसाधन में बदला जा रहा है। पर्यावरणविदों ने कोयला मंत्रालय के इस कदम की सराहना की है और कहा है कि यह परियोजना न केवल भूजल पर दबाव कम करेगी, बल्कि खनन क्षेत्रों में रहने वाले लाखों लोगों के स्वास्थ्य और जीवन स्तर में भी अभूतपूर्व सुधार लाएगी।



