कोयला मंत्रालय आज नई दिल्ली में ‘आरोह’ (AAROH) पहल लॉन्च करेगा; भारत-जर्मनी कार्यान्वयन समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएंगे

राघवेंद्र प्रताप सिंह/ नई दिल्ली: ऊर्जा क्षेत्र में हरित बदलाव (Green Transition) और पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से, केंद्रीय कोयला मंत्रालय आज नई दिल्ली में अपनी बहुप्रतीक्षित ‘आरोह’ (AAROH – Advanced Action for Restoration and Environmental Opportunities in Mining) पहल का आधिकारिक शुभारंभ करने जा रहा है। इस ऐतिहासिक अवसर पर भारत और जर्मनी के बीच खनन क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण और सतत प्रौद्योगिकियों के उपयोग को लेकर एक महत्वपूर्ण ‘कार्यान्वयन समझौते’ (Implementation Agreement) पर हस्ताक्षर भी किए जाएंगे।
क्या है ‘आरोह’ (AAROH) पहल का उद्देश्य?
‘आरोह’ पहल का प्राथमिक उद्देश्य कोयला खनन क्षेत्रों में पर्यावरणीय नुकसान को कम करना, बंद पड़ी खदानों का ईको-रेस्टोरेशन (Eco-Restoration) करना और खनन क्षेत्रों के आसपास रहने वाले स्थानीय समुदायों के लिए दीर्घकालिक आजीविका के साधन विकसित करना है। इसके तहत देश भर के प्रमुख कोयला खनन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर वनीकरण (Afforestation), भूमि सुधार और जल संरक्षण परियोजनाओं को एक एकीकृत समय-सीमा के भीतर लागू किया जाएगा।
भारत-जर्मनी तकनीकी सहयोग
जर्मनी के साथ हुआ यह समझौता भारत के कोयला क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जर्मनी के पास अपनी पुरानी कोयला खदानों को हरित पार्कों, सौर ऊर्जा संयंत्रों और पर्यटन स्थलों में बदलने का दशकों पुराना अनुभव है। इस समझौते के तहत जर्मनी भारत को खदानों के पुनरुद्धार (Mine Reclamation), कार्बन कैप्चर तकनीकों (CCUS) और हरित खनन प्रौद्योगिकियों में तकनीकी सहायता, वित्तीय परामर्श और क्षमता निर्माण (Capacity Building) में सहयोग प्रदान करेगा।
सतत विकास (Sustainable Development) की ओर कदम
कोयला मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि भारत अपनी बढ़ती ऊर्जा जरूरतों के लिए कोयले पर निर्भर रहते हुए भी पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता से पीछे नहीं हट रहा है। ‘आरोह’ पहल यह सुनिश्चित करेगी कि खनन के बाद छोड़ी गई भूमि को पुनः उपजाऊ और उपयोगी बनाया जा सके। इस कार्यक्रम में सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख कंपनियां जैसे कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) और उसकी सहायक कंपनियां अग्रिम भूमिका निभाएंगी। यह पहल भारत के ‘नेट-जीरो’ (Net-Zero) लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम साबित होगी।



