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मप्र में यूसीसी लागू होने के बाद संपत्ति कानून, शादी-तलाक से लेकर लिव-इन तक के नियमों में होंगे बड़े बदलाव

भोपाल : मध्य प्रदेश सरकार ने विधानसभा के मानसून सत्र में मंगलवार को समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पारित करा लिया। अब राज्यपाल की राज्यपाल की स्वीकृति मिलने के बाद इसका राजपत्र (गजट) में नोटिफिकेशन जारी होगा और इसके साथ ही मध्य प्रदेश में यूसीसी लागू हो जाएगा। इसके लागू होने के बाद संपत्ति कानून, शादी-तलाक से लेकर लिव-इन तक को लेकर कड़े प्रावधान किए गए हैं।

 

राज्य सरकार इसे सभी नागरिकों को बिना किसी भेदभाव के समान अधिकार देने वाला बिल बता रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संकेत दिए हैं कि इसी माह प्रदेश में यूसीसी लागू हो जाएगा, साथ ही कहा कि समान नागरिक संहिता से सभी का भला सुनिश्चित होगा। आइए जानते हैं कि यूसीसी विधेयक के प्रारूप में क्या-क्या बदलाव किए गए हैं और इनका लोगों पर क्या असर पड़ेगा?

 

मध्य प्रदेश सरकार के अनुसार, राज्य में अभी विवाह, विवाह-विच्छेद, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण, लिव-इन संबंध और अन्य पारिवारिक मामलों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानून लागू हैं। सरकार का कहना है कि इन सभी कानूनों का समग्र अध्ययन कर एक समान, संतुलित और व्यावहारिक कानूनी व्यवस्था तैयार करने की आवश्यकता महसूस की गई। इसी उद्देश्य से 27 अप्रैल 2026 को न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में सात सदस्यीय समिति का गठन किया गया। समिति में शिक्षाविद, विधि विशेषज्ञ, सामाजिक कार्यकर्ता और प्रशासनिक अधिकारी शामिल थे।

 

समिति ने राज्य में लागू विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों का अध्ययन किया। साथ ही उत्तराखंड और गुजरात जैसे राज्यों में अपनाए गए मॉडल का भी परीक्षण किया। समिति ने आम नागरिकों, सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों, विधि विशेषज्ञों और शिक्षाविदों से सुझाव और आपत्तियां मांगीं। महिलाओं और बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा, समानता और संरक्षण को ध्यान में रखते हुए सुझाव तैयार किए गए। लिव-इन संबंधों के पंजीकरण और उनसे जुड़े अधिकारों एवं दायित्वों पर भी समिति ने विचार किया। साथ ही प्रस्तावित कानून के कानूनी, प्रशासनिक और क्रियान्वयन संबंधी पहलुओं का अध्ययन किया, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की कानूनी जटिलता न हो। समिति को 60 दिनों के भीतर ड्राफ्ट बिल और विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंपने की जिम्मेदारी दी गई।

 

जनभागीदारी सुनिश्चित करने के लिए 22 मई 2026 को एक वेब पोर्टल शुरू किया गया। इस दौरान लगभग 3.49 करोड़ एसएमएस भेजे गए। वेब पोर्टल पर 9,58,675 सुझाव प्राप्त हुए। जिला और राज्य स्तर पर 50 से अधिक जनपरामर्श बैठकें आयोजित की गईं। इन बैठकों से 10,134 से अधिक सुझाव मिले। सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 93.54% लोगों ने प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू करने का समर्थन किया।

 

 

 

समान नागरिक संहिता विधेयक केवल विवाह और तलाक तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें उत्तराधिकार, संपत्ति बंटवारे और वसीयत के लिए भी एक समान प्रावधान किए गए हैं। इसमें प्रावधान है कि बिना वसीयत मृत्यु होने पर पति-पत्नी, बच्चों और गर्भस्थ शिशु को भी समान अधिकार मिलेगा। संपत्ति के लिए किसी की हत्या या हत्या का प्रयास करने वाले व्यक्ति को इससे पूरी तरह बेदखल कर दिया जाएगा। देश की सुरक्षा में लगे सैनिकों को मौखिक वसीयत की विशेष सुविधा दी जाएगी। इससे जुड़े विवादों की अपील सीधे उच्च न्यायालय में की जा सकेगी।

 

यूसीसी विधेयक के महत्वपूर्ण प्रावधान

 

– विवाह के बाद दूसरा विवाह तब तक नहीं किया जा सकेगा, जब तक पहला विवाह कानूनी रूप से समाप्त न हो जाए।

 

– केवल तलाक, तलाक, तलाक कह देने से विवाह समाप्त नहीं होगा। तलाक तभी प्रभावी होगा जब कानूनी प्रक्रिया पूरी होगी।

 

– धर्म आधारित अलग-अलग नियमों को हटाकर उत्तराधिकार और वसीयत के लिए पूरे प्रदेश में एक समान व्यवस्था लागू होगी।

 

– महिलाओं और पुरुषों को उत्तराधिकार में समान अधिकार मिलेंगे।

 

– जिन कानूनों में महिलाओं के अधिकार कम थे, वहां भाई और बहनों को समान अधिकार दिए जाएंगे।

 

– महिलाओं की गरिमा, सम्मान और नारी सशक्तिकरण को इस कानून का प्रमुख उद्देश्य बताया गया है।

 

– अनुसूचित जनजातियों और संरक्षित रूढ़िगत समूहों को इस कानून से बाहर रखा गया है।

 

– धार्मिक समारोह, अनुष्ठान और परंपराएं पहले की तरह जारी रहेंगी।

 

– विवाह का पंजीकरण पंचायत से लेकर नगरीय निकाय तक अनिवार्य होगा।

 

– एक जीवनसाथी के रहते दूसरा विवाह करने की अनुमति नहीं होगी।

 

– न्यायालय के बाहर विवाह विच्छेद मान्य नहीं होगा।

 

– पुत्र और पुत्रियों को समान अधिकार प्राप्त होंगे।

 

– महिलाओं को संपत्ति में वही अधिकार मिलेंगे जो पुरुषों को प्राप्त हैं।

 

– सेना, वायुसेना और नौसेना के जवानों के लिए विशेषाधिकार प्राप्त वसीयत लागू रहेगी, यहाँ तक कि विशेष परिस्थितियों में वे मौखिक वसीयत भी कर सकेंगे।

 

लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर क्या नियम?

 

– लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों के लिए एक महीने के भीतर पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा।

 

– लिव-इन संबंध के लिए पुरुष की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और महिला की न्यूनतम आयु 18 वर्ष होगी।

 

– अगर कोई व्यक्ति पहले से विवाहित है तो वह इस व्यवस्था के तहत लिव-इन संबंध में नहीं आ सकेगा।

 

– अगर कोई विवाहित व्यक्ति लिव-इन संबंध बनाता है तो उसे पांच वर्ष तक की सजा हो सकती है।

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