भारतीय सेना ने लद्दाख और अरुणाचल सीमा पर नई पीढ़ी की एंटी-ड्रोन मिसाइल प्रणालियों की तैनाती पूरी की

विवेक ओझा/ लेह / तवांग: चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चल रही रणनीतिक खींचतान के बीच भारतीय सेना ने सीमा सुरक्षा को लेकर एक और बड़ा और आक्रामक कदम उठाया है। रक्षा सूत्रों के हवाले से मिली पुख्ता जानकारी के अनुसार, भारतीय सेना ने पूर्वी लद्दाख की बर्फीली चोटियों से लेकर अरुणाचल प्रदेश के घने जंगलों तक, नई पीढ़ी की उन्नत ‘एंटी-ड्रोन मिसाइल प्रणालियों’ (Anti-Drone Systems) की तैनाती पूरी कर ली है। यह आधुनिक रक्षा कवच एलएसी पर दुश्मन के किसी भी हवाई खतरे को पलक झपकते ही नेस्तनाबूद करने में सक्षम है।
क्यों पड़ी इन प्रणालियों की जरूरत?
आधुनिक युद्धनीति (Modern Warfare) में ड्रोन्स का इस्तेमाल बहुत तेजी से बढ़ा है। आर्मेनिया-अजरबैजान युद्ध और हालिया रूस-यूक्रेन संघर्ष ने यह स्पष्ट कर दिया है कि छोटे और सस्ते ड्रोन्स बड़े टैंकों और रडार प्रणालियों को भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं। चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) पिछले कुछ समय से एलएसी के पास ‘स्वार्म ड्रोन्स’ (Swarm Drones – एक साथ उड़ने वाले सैकड़ों ड्रोन्स का झुंड) और निगरानी ड्रोन्स का लगातार परीक्षण कर रही थी। इसके जवाब में भारतीय सेना को एक ऐसी अचूक प्रणाली की जरूरत थी, जो दुश्मन के ड्रोन्स को भारतीय सीमा में घुसने से पहले ही जाम या नष्ट कर सके।
पूर्णतः स्वदेशी ‘सॉफ्ट किल’ और ‘हार्ड किल’ तकनीक
खास बात यह है कि सेना द्वारा तैनात की गई ये नई एंटी-ड्रोन प्रणालियां मुख्य रूप से ‘मेक इन इंडिया’ (Make in India) के तहत डीआरडीओ (DRDO) और भारतीय निजी रक्षा कंपनियों द्वारा विकसित की गई हैं। ये प्रणालियां दोहरे तरीके से काम करती हैं। पहली ‘सॉफ्ट किल’ (Soft Kill) तकनीक है, जिसके जरिए दुश्मन के ड्रोन की रेडियो फ्रीक्वेंसी (RF) और जीपीएस (GPS) सिग्नल को जाम कर दिया जाता है, जिससे वह रास्ता भटक कर गिर जाता है।
अगर दुश्मन का ड्रोन फिर भी आगे बढ़ता है, तो सिस्टम की ‘हार्ड किल’ (Hard Kill) तकनीक सक्रिय हो जाती है। इसके तहत लेजर हथियारों या बेहद तीव्र माइक्रो-मिसाइलों के जरिए ड्रोन को हवा में ही भस्म कर दिया जाता है। यह पूरा सिस्टम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) द्वारा संचालित है, जो पक्षियों और दुश्मन के ड्रोन्स के बीच आसानी से फर्क कर सकता है।
इस नई तैनाती ने लद्दाख के चुशुल और डेपसांग मैदानों से लेकर अरुणाचल के तवांग सेक्टर तक भारतीय वायु रक्षा (Air Defence) ग्रिड को अभेद्य बना दिया है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय सेना की यह तकनीकी बढ़त एलएसी पर किसी भी प्रकार के चीनी दुस्साहस को रोकने में निर्णायक साबित होगी।



