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दिल्ली मेट्रो का फेज-4 विस्तार: तीन नए रूट्स पर सिविल कंस्ट्रक्शन का काम 80 प्रतिशत तक पूरा, ट्रायल जल्द

पल्लवी श्रीवास्तव/  नई दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर के लाखों यात्रियों के सफर को और अधिक सुगम बनाने के लिए दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) तेजी से अपने ‘फेज-4’ (Phase-4) प्रोजेक्ट को पूरा करने की ओर बढ़ रहा है। मंगलवार को डीएमआरसी द्वारा जारी की गई प्रगति रिपोर्ट के अनुसार, फेज-4 के तहत स्वीकृत तीन मुख्य कॉरिडोर पर सिविल कंस्ट्रक्शन का काम 80 प्रतिशत तक पूरा कर लिया गया है। इस तेज गति को देखते हुए अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि इस साल के अंत तक कुछ हिस्सों पर ट्रेनों का ट्रायल रन शुरू किया जा सकता है।

किन तीन नए रूट्स पर चल रहा है काम?

फेज-4 के इस पहले चरण में कुल 65 किलोमीटर से अधिक लंबी तीन नई लाइनें बिछाई जा रही हैं। इनमें पहली लाइन ‘जनकपुरी वेस्ट से आर.के. आश्रम मार्ग’ (मेजेंटा लाइन का विस्तार) है, जो पुरानी दिल्ली और बाहरी दिल्ली के बड़े हिस्से को जोड़ेगी। दूसरी लाइन ‘मजलिस पार्क से मौजपुर’ (पिंक लाइन का विस्तार) है, जिसके पूरा होने से पिंक लाइन दिल्ली मेट्रो के इतिहास का पहला ‘रिंग कॉरिडोर’ (Ring Corridor) बन जाएगी। तीसरी महत्वपूर्ण लाइन ‘तुगलकाबाद से दिल्ली एयरोसिटी’ (सिल्वर लाइन) है, जो फरीदाबाद और दक्षिण दिल्ली के लोगों को सीधे आईजीआई (IGI) एयरपोर्ट से कनेक्ट करेगी।

ड्राइवरलेस ट्रेनें और अत्याधुनिक तकनीक

डीएमआरसी के प्रबंध निदेशक ने जानकारी दी है कि फेज-4 के ये सभी कॉरिडोर पूरी तरह से ‘ड्राइवरलेस तकनीक’ (Driverless Technology – UTO) से लैस होंगे। सिग्नलिंग सिस्टम और कम्युनिकेशन-बेस्ड ट्रेन कंट्रोल (CBTC) को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप अपग्रेड किया जा रहा है। इसके साथ ही, इन नई लाइनों पर बनने वाले स्टेशनों को ‘ग्रीन बिल्डिंग’ कॉन्सेप्ट के तहत डिजाइन किया जा रहा है, जिसमें सोलर पैनल और रेनवाटर हार्वेस्टिंग की सुविधा इन-बिल्ट होगी।

ट्रैफिक जाम और प्रदूषण से मिलेगी मुक्ति

इन तीन नए कॉरिडोर्स के शुरू होने से दिल्ली की सड़कों पर गाड़ियों का दबाव काफी हद तक कम हो जाएगा। एक अनुमान के मुताबिक, फेज-4 के पूरा होने पर दिल्ली मेट्रो के नेटवर्क में रोजाना लगभग 15 लाख नए यात्री जुड़ेंगे। इससे आउटर रिंग रोड, महरौली-बदरपुर रोड और वजीराबाद रोड जैसे अति-व्यस्त इलाकों में लगने वाले भारी ट्रैफिक जाम से लोगों को स्थायी राहत मिलेगी। साथ ही, वाहनों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन (Carbon Emission) में भी भारी गिरावट आएगी।

यात्रियों को अब बस उस दिन का इंतजार है, जब मेट्रो के नए रूट्स उनके घरों के और करीब पहुंच जाएंगे और दिल्ली की सार्वजनिक परिवहन प्रणाली दुनिया के सर्वश्रेष्ठ नेटवर्क्स को भी पीछे छोड़ देगी।

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