भारत बनेगा दुनिया का अगला ‘ग्लोबल चिप हब’: कैबिनेट ने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के दूसरे चरण को दी मंजूरी, 1.27 लाख करोड़ का विशाल बजट आवंटित

अभिषेक सिंह/ नई दिल्ली: इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग और ‘डीप टेक’ के क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में आज केंद्र सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा और महात्वाकांक्षी कदम उठाया है। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन’ (India Semiconductor Mission – ISM) के ‘दूसरे चरण’ को आधिकारिक मंजूरी दे दी गई है। इस महाप्रोजेक्ट के लिए अगले छह वर्षों (2026-2032) के लिए 1.27 लाख करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट आवंटित किया गया है।
चीन और ताइवान पर निर्भरता खत्म करने की तैयारी
आज के डिजिटल युग में स्मार्टफोन से लेकर फाइटर जेट्स, कारों और चिकित्सा उपकरणों तक, हर जगह सेमीकंडक्टर (Microchips) का उपयोग होता है। वर्तमान में भारत अपनी 90% चिप्स के लिए चीन, ताइवान और दक्षिण कोरिया पर निर्भर है। कोविड-19 महामारी के दौरान चिप्स की कमी ने पूरी दुनिया की सप्लाई चेन को पंगु बना दिया था। इस दूसरे चरण का मुख्य उद्देश्य भारत को केवल चिप डिजाइनिंग तक सीमित न रखकर, चिप का निर्माण (Manufacturing) करने वाला एक ‘ग्लोबल हब’ बनाना है।
कहां खर्च होगा यह 1.27 लाख करोड़ का फंड?
सूचना और प्रौद्योगिकी (IT) मंत्री ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि यह विशाल फंड देश में ‘सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम’ तैयार करने के लिए विभिन्न प्रोत्साहन योजनाओं (PLI) के रूप में खर्च किया जाएगा:
1. नए फैब प्लांट (Fabs): इस फंड का एक बड़ा हिस्सा देश में नए वाणिज्यिक सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन (Fab) प्लांट्स स्थापित करने वाली वैश्विक कंपनियों (जैसे माइक्रोन, फॉक्सकॉन, टाटा आदि) को 50% तक की कैपिटल सब्सिडी (Capital Subsidy) देने में किया जाएगा।
2. OSAT और ATMP: आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट (OSAT) सुविधाओं के विकास पर जोर दिया जाएगा, जहां तैयार चिप्स की पैकेजिंग और टेस्टिंग होती है।
3. डिस्प्ले फैब्रिकेशन: मोबाइल और टीवी स्क्रीन के लिए भारत में ही डिस्प्ले पैनल बनाने वाली इकाइयों को भारी वित्तीय सहायता दी जाएगी।
4. कौशल विकास: देश के 100 से अधिक इंजीनियरिंग कॉलेजों में चिप डिजाइनिंग के विशेष पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे, ताकि अगले 5 वर्षों में 85,000 से अधिक ‘इंडस्ट्री-रेडी’ सेमीकंडक्टर इंजीनियर तैयार किए जा सकें।
राष्ट्रीय सुरक्षा और रोजगार सृजन
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सैन्य उपकरणों (जैसे रडार, मिसाइल सिस्टम) में आयातित चिप्स का उपयोग राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा हो सकता है (हार्डवेयर बैकडोर की आशंका)। इसलिए स्वदेशी चिप निर्माण सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके अलावा, इस 1.27 लाख करोड़ के निवेश से देश में लाखों की संख्या में उच्च-कुशल (High-skilled) प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होने का अनुमान है। सरकार का यह कदम भारत को वैश्विक तकनीकी आपूर्ति श्रृंखला (Global Tech Supply Chain) का एक अटूट और विश्वसनीय हिस्सा बनाने में मील का पत्थर साबित होगा।



