भारत-थाईलैंड समुद्री सहयोग को मिली मजबूती, सट्टाहीप बंदरगाह की यात्रा संपन्न

नई दिल्ली (राघवेंद्र प्रताप सिंह) : भारतीय नौसेना के पूर्वी बेड़े के युद्धपोत आईएनएस उदयगिरि, आईएनएस कवरत्ती और आईएनएस शक्ति ने थाईलैंड के सट्टाहीप बंदरगाह की अपनी निर्धारित यात्रा सफलतापूर्वक पूरी कर ली है। पूर्वी बेड़े के फ्लैग ऑफिसर रियर एडमिरल आलोक आनंद के नेतृत्व में ये युद्धपोत 29 जून को दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में अपनी अगली परिचालन तैनाती के लिए रवाना हो गए।
भारत-थाईलैंड समुद्री सहयोग को मिली मजबूती :
यह यात्रा दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ भारत की निरंतर समुद्री सहभागिता का हिस्सा थी। इसके माध्यम से भारत और थाईलैंड के बीच लंबे समय से चले आ रहे समुद्री सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने का प्रयास किया गया।
नौसैनिक सहयोग बढ़ाने पर हुई चर्चा :
यात्रा के दौरान दोनों देशों की नौसेनाओं के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच द्विपक्षीय नौसैनिक सहयोग को और मजबूत बनाने पर चर्चा हुई। बातचीत में समुद्री सुरक्षा, क्षेत्रीय सहयोग, परिचालन समन्वय और आपसी सहभागिता को बढ़ाने जैसे विषय प्रमुख रहे।
पेशेवर आदान-प्रदान और खेल गतिविधियां आयोजित :
सट्टाहीप बंदरगाह पर प्रवास के दौरान भारतीय नौसेना के युद्धपोतों ने रॉयल थाई नौसेना के साथ पेशेवर आदान-प्रदान, परिचालन संबंधी विचार-विमर्श और खेल गतिविधियों में भाग लिया। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य दोनों नौसेनाओं के बीच तालमेल और सहयोग को और मजबूत करना था।
युद्धपोतों पर आयोजित हुआ स्वागत समारोह :
बंदरगाह प्रवास के दौरान आईएनएस उदयगिरि और आईएनएस कवरत्ती पर स्वागत समारोह का आयोजन किया गया। इसमें थाईलैंड में भारत के राजदूत, रॉयल थाई नौसेना के वरिष्ठ अधिकारी, राजनयिक समुदाय के प्रतिनिधि तथा भारतीय समुदाय के प्रमुख सदस्यों ने हिस्सा लिया।
सागर विजन के प्रति भारत की प्रतिबद्धता का प्रदर्शन :
भारतीय नौसेना के अनुसार यह तैनाती भारत के ‘सागर’ (क्षेत्रों में सुरक्षा एवं विकास के लिए आपसी और समग्र उन्नति) दृष्टिकोण को आगे बढ़ाती है। यह सामूहिक समुद्री सुरक्षा, क्षेत्रीय साझेदारी और नियम-आधारित समुद्री व्यवस्था के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करती है। साथ ही यह भारत और थाईलैंड के बीच गहरे समुद्री सहयोग, पारस्परिक विश्वास, मैत्रीपूर्ण संबंधों और दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी का भी प्रतीक है।



