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पश्चिम बंगाल दिवस: पीएम मोदी ने दी राज्यवासियों को शुभकामनाएं

'अखंड भारत' के निर्माण में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के ऐतिहासिक योगदान को किया नमन

राघवेंद्र प्रताप सिंह /नई दिल्ली: भारत के गौरवशाली इतिहास, समृद्ध संस्कृति और बौद्धिक विरासत के अहम केंद्र रहे पश्चिम बंगाल के स्थापना दिवस (West Bengal Day) के अवसर पर आज देशभर में राज्य के योगदान को याद किया जा रहा है। इस विशेष अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल की जनता को अपनी हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। प्रधानमंत्री ने राज्यवासियों की सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हुए आधुनिक और अखंड भारत के निर्माण में जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के ऐतिहासिक और निर्णायक योगदान को विशेष रूप से याद किया है।

पीएम मोदी का संदेश: संस्कृति और संघर्ष को सलाम
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपना बधाई संदेश साझा करते हुए पश्चिम बंगाल की धरती को वीरों, विचारकों और स्वतंत्रता सेनानियों की जन्मभूमि बताया। उन्होंने कहा कि बंगाल का इतिहास भारत के स्वतंत्रता संग्राम की रीढ़ रहा है और यहाँ की कला, साहित्य व आध्यात्मिकता ने पूरे विश्व में भारत का मान बढ़ाया है।

बधाई संदेश के साथ-साथ प्रधानमंत्री ने 20 जून के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करते हुए डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को श्रद्धांजलि अर्पित की। पीएम मोदी ने कहा कि आज अगर पश्चिम बंगाल भारत का एक अभिन्न और गौरवशाली हिस्सा है, तो इसका बहुत बड़ा श्रेय डॉ. मुखर्जी की दूरदर्शिता और उनके कड़े संघर्ष को जाता है।

20 जून का ऐतिहासिक महत्व और डॉ. मुखर्जी की भूमिका
‘पश्चिम बंगाल दिवस’ के अवसर पर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का स्मरण केवल एक राजनीतिक औपचारिकता नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक गहरा ऐतिहासिक संदर्भ छिपा है। इतिहास के पन्नों को पलटें तो 20 जून 1947 ही वह ऐतिहासिक दिन था, जब बंगाल विधानसभा में हुए एक अहम मतदान के जरिए यह तय हुआ था कि बंगाल का विभाजन होगा और इसका एक हिस्सा (पश्चिम बंगाल) भारत के साथ रहेगा।

जब 1947 में भारत के विभाजन की रूपरेखा तैयार हो रही थी, तब पूरे बंगाल को पाकिस्तान (पूर्वी पाकिस्तान, जो अब बांग्लादेश है) में शामिल करने की साजिश रची जा रही थी। उस नाजुक और चुनौतीपूर्ण समय में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने बंगाल के हिंदू बहुल क्षेत्रों को भारत में बनाए रखने के लिए एक सशक्त आंदोलन का नेतृत्व किया था। उनके प्रखर तर्कों और कड़े राजनीतिक दबाव के कारण ही बंगाल का विभाजन हुआ और पश्चिम बंगाल ‘अखंड भारत’ के नक्शे पर सुरक्षित रह सका।

बंगाल के विकास के प्रति केंद्र की प्रतिबद्धता
इस अवसर पर केंद्र सरकार के अन्य वरिष्ठ मंत्रियों और नेताओं ने भी पश्चिम बंगाल की जनता को बधाई दी। संदेशों में यह स्पष्ट किया गया कि केंद्र सरकार राज्य के समग्र विकास, बुनियादी ढांचे की मजबूती और युवाओं के रोजगार के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। हाल ही में केंद्र द्वारा राज्य में रेलवे, हाइवे और जलमार्ग से जुड़ी कई बड़ी परियोजनाओं को हरी झंडी दिखाई गई है, जो इस बात का प्रमाण है कि बंगाल का विकास राष्ट्रीय प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर है।

विरासत और भविष्य का संगम
पश्चिम बंगाल हमेशा से देश को नई दिशा दिखाने वाला राज्य रहा है। चाहे वह रवींद्रनाथ टैगोर का साहित्य हो, स्वामी विवेकानंद का वेदांत दर्शन हो, या नेताजी सुभाष चंद्र बोस का शौर्य—बंगाल की धरती ने हर युग में भारत का नेतृत्व किया है। प्रधानमंत्री का यह बधाई संदेश इसी समृद्ध विरासत के सम्मान और राज्य के एक उज्ज्वल, विकसित भविष्य की कामना का प्रतीक है। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के योगदान को याद कर देश की युवा पीढ़ी को उस कड़े संघर्ष से भी अवगत कराया गया है, जिसने आज के आधुनिक पश्चिम बंगाल की नींव रखी थी।

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