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खाशाबा जाधव को पद्म विभूषण: बॉम्बे हाई कोर्ट का केंद्र को 4 मई तक निर्णय लेने का निर्देश

बंबई उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि भारत के पहले व्यक्तिगत ओलंपिक पदक विजेता पहलवान खाशाबा दादासाहेब जाधव को मरणोपरांत पद्म विभूषण दिए जाने के संबंध में 4 मई तक निर्णय लिया जाए।

उच्च न्यायालय की कोल्हापुर पीठ के न्यायाधीश माधव जामदार और प्रवीण पाटिल ने 15 अप्रैल को अपने आदेश में कहा कि इस बात को लेकर कोई विवाद नहीं है कि महाराष्ट्र के रहने वाले पहलवान खाशाबा जाधव भारत के पहले व्यक्तिगत ओलंपिक पदक विजेता थे। यह आदेश ‘कुश्तीवीर खाशाबा जाधव फाउंडेशन’ द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया। इस फाउंडेशन की स्थापना खाशाबा जाधव के पुत्र रणजीत जाधव ने की थी।

याचिका में गृह मंत्रालय (पद्म पुरस्कार प्रकोष्ठ) को यह निर्देश देने की मांग की गई थी कि वह खाशाबा दादासाहेब जाधव को देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से मरणोपरांत सम्मानित करने के लिए मामले पर पुनर्विचार करे और नए सिरे से निर्णय ले। उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा, “भारत सरकार को 4 मई या उससे पहले उचित निर्णय लेने का निर्देश दिया जाता है।” इस मामले की अगली सुनवाई 5 मई के लिए तय की गई है।

साभार : गूगल

खाशाबा जाधव ने 1952 के हेलसिंकी ओलंपिक खेलों में कांस्य पदक जीता था। उनका निधन 1984 में हुआ था। उन्हें 2001 में मरणोपरांत अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। याचिका में यह भी दावा किया गया है कि दिवंगत पहलवान के परिवार ने उन्हें सम्मान दिलाने के लिए कई बार आवेदन दिए थे, लेकिन कोई जवाब नहीं मिलने पर फाउंडेशन ने अदालत का रुख किया।

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