अभिषेक शर्मा की चुनौतीपूर्ण शुरुआत: क्या फॉर्म फिर से लौटेगा?
टी20 विश्व कप में सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा के लिए यह टूर्नामेंट चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। उन्होंने लगातार तीन मैचों में शून्य पर आउट होकर भारतीय टीम के अभियान को प्रभावित नहीं होने दिया है, लेकिन उनका व्यक्तिगत प्रदर्शन चर्चा का विषय बन गया है।
उनकी फॉर्म की गिरावट के पीछे दो मुख्य कारण बताए जा रहे हैं: पेट के संक्रमण से उनकी कमजोरी या फिर धीमे विकेटों पर स्पिनरों के खिलाफ उनकी तकनीकी कमजोरी। हालांकि, जो लोग इस खिलाड़ी को करीब से जानते हैं, उनका मानना है कि ‘‘फॉर्म अस्थायी है, आत्मविश्वास स्थायी’’ होता है।
अभिषेक का स्ट्राइक रेट 192 के आस-पास का है, जो साबित करता है कि वह काफी आक्रामक बल्लेबाज हैं, लेकिन पेट के संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती होने के कुछ दिन बाद उनका फॉर्म खराब हो गया। यही नहीं, धीमी पिचों ने भी उनके खेलने की शैली को प्रभावित किया है।
हालांकि, टीम की सामूहिक मेहनत ने यह सुनिश्चित किया है कि नतीजे प्रभावित न हों। अब, सुपर आठ चरण की शुरुआत में, यह अभिषेक के लिए महत्वपूर्ण होगा कि वह अपनी लय फिर से हासिल करें, खासकर जब भारत को 22 फरवरी को दक्षिण अफ्रीका से मुकाबला करना है।

दक्षिण अफ्रीका के कप्तान एडेन मारक्रम इस बात को लेकर सतर्क हो सकते हैं कि अभिषेक का आउट होने का तरीका ध्यान से देखा जाए।
पिछले मैचों के दौरान अभिषेक के विकेट पर गिरने के तरीके को देखते हुए, मारक्रम शायद पावरप्ले में कागिसो रबाडा और लुंगी एनगिडी के बजाय ऑफ-ब्रेक गेंदबाजों का इस्तेमाल करने पर विचार कर सकते हैं, या जॉर्ज लिंडे को गेंदबाजी करने को कह सकते हैं।
टी20 में गलतियां कम की जा सकती हैं, और अभिषेक का शून्य पर आउट होना गंभीर चिंता का कारण नहीं है। शायद वह दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ अपनी लय को वापस पा लें, या फिर जिम्बाब्वे और वेस्टइंडीज के खिलाफ खेले जाने वाले मैचों में बेहतर प्रदर्शन करें।
आईपीएल के एक प्रमुख बल्लेबाजी कोच ने भी अभिषेक के खिलाफ टीमों की रणनीति बनाई थी और उनका विश्लेषण किया था। जब उनसे पूछा गया कि क्या अब टीमों ने अभिषेक को समझ लिया है, तो उनका जवाब था ‘‘नहीं’’।
उन्होंने कहा, ‘‘पहले मैच में डीप एक्स्ट्रा कवर पर एक खराब गेंद पर अभिषेक आउट हुए थे, जो शायद छह रन के लिए जाती, या फिर फील्डर के बाएं या दाएं से बाहर जाकर चौके के लिए जाती।’’
इसके बाद उन्होंने अभिषेक के तीनों आउट होने के तरीकों को विश्लेषित करते हुए कहा, ‘‘ऑफ-स्पिनर की अंदर आती गेंद पर बोल्ड होना, मिड-ऑन पर कैच होना, यह कोई नया पैटर्न नहीं दिखाता।’’ कोच का मानना है कि अभिषेक आम तौर पर ऑफ-स्पिनर्स को अच्छे से खेलते हैं और उनके आउट होने का कारण विशेष तकनीकी कमजोरी नहीं है।
हालांकि, विकेटों की धीमी गति उनके खेलने के तरीके पर असर डाल सकती है, क्योंकि अभिषेक की बैटिंग स्विंग काफी तेज होती है और वह तेज गेंदबाजों के खिलाफ अधिक सफल होते हैं।
अभिषेक के लिए यह उनके अंतरराष्ट्रीय करियर का पहला चरण है, जहां उन्हें लगातार मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इस मुश्किल समय में सीतांशु कोटक जैसे अनुभवी बल्लेबाजी कोच की भूमिका अहम हो जाती है।
अभिषेक के आत्मविश्वास को देखते हुए यह स्पष्ट है कि वह इन निराशाओं से जल्दी प्रभावित नहीं होंगे। हालांकि, वह यह अच्छे से जानते होंगे कि भारत के टी20 विश्व कप अभियान में उनकी शुरुआत कितनी अहम है।



