फगवाड़ा से वर्ल्ड कप तक: इटली के लिए खेलने वाले जसप्रीत सिंह की असाधारण यात्रा
‘चलो! हम हिंदी में बात करेंगे।’
इटली के किसी क्रिकेटर के इंटरव्यू से पहले यह पंक्ति सुनना असामान्य है, जसप्रीत सिंह की कहानी ही साधारण नहीं है। इटली का प्रतिनिधित्व करने वाले इस तेज़ गेंदबाज़ ने भले ही अपनी ज़िंदगी का बड़ा हिस्सा यूरोप में बिताया हो, लेकिन न तो अपनी भाषा छोड़ी, न ही पंजाब के फगवाड़ा से अपना रिश्ता।
22 साल पहले, महज़ 10 वर्ष की उम्र में जसप्रीत अपने माता-पिता तीरथ सिंह और जसवीर कौर के साथ इटली के बर्गमो शहर पहुँचे। यह उनके परिवार के लिए एक बड़ा कदम था, लेकिन साथ ही अनिश्चितताओं से भरा हुआ भी।
नया देश, नई भाषा और नई संस्कृति—सब कुछ बिल्कुल अनजान था। ऊपर से माता-पिता को फैक्ट्री मज़दूर के तौर पर काम शुरू करना पड़ा।
जसप्रीत ने एक न्यूज़ एजेंसी से कहा, “जब हमें इटली जाने का मौका मिला तो यह हमारे लिए खुशी और चिंता—दोनों का दिन था। लेकिन मेरे मन में बस यही चल रहा था कि मैं क्रिकेट कैसे खेलूंगा, जो मैं पंजाब में बचपन से खेलता आया था।”क्रिकेट-प्रेमी बच्चे के लिए इटली आसान जगह नहीं थी।
उस समय इस यूरोपीय देश में क्रिकेट का न तो ढांचा था और न ही मैदान। इसके बावजूद जसप्रीत ने बर्गमो क्रिकेट क्लब जॉइन किया, जहाँ सुविधाएँ बेहद सीमित थीं। साथ ही परिवार की मदद के लिए उन्होंने दो साल का इलेक्ट्रीशियन कोर्स भी पूरा किया।

उनकी राह तब थोड़ी आसान हुई जब स्थानीय गुरुद्वारे में मिले कुछ भारतीय प्रवासियों ने उन्हें आगे बढ़ने का रास्ता दिखाया। उन्होंने जसप्रीत को इंग्लैंड जाने की सलाह दी, जहाँ टर्फ विकेट पर क्रिकेट खेलने का मौका मिल सकता था।
इसी सलाह ने जसप्रीत को बर्मिंघम पहुँचा दिया। वहाँ वे बर्मिंघम एवं जिला प्रीमियर लीग में खेलने लगे। अपने खर्च पूरे करने के लिए उन्होंने उबर ड्राइवर के रूप में भी काम किया, जिससे उन्हें अभ्यास और मैचों के लिए समय की आज़ादी मिल सकी।
“भारत में बचपन से क्रिकेट खेलता आया था। इटली गया तो वही जारी रखना चाहता था, लेकिन वहाँ न मैदान थे, न स्टेडियम। इंग्लैंड जाकर लगा कि क्रिकेट फिर से ज़िंदा हो गया है,” जसप्रीत ने कहा।
कड़ी मेहनत रंग लाई और 2019 में जसप्रीत ने नॉर्वे के खिलाफ इटली के लिए अंतरराष्ट्रीय पदार्पण किया। इसके बाद इटली की टीम 2024 टी20 विश्व कप के लिए क्वालीफाई करने के बेहद करीब पहुँची, लेकिन आयरलैंड से करीबी हार ने सपना तोड़ दिया।
टीम ने हार नहीं मानी। जून 2025 में यूरोपीय क्षेत्रीय क्वालीफायर में शीर्ष स्थान हासिल कर आखिरकार इटली ने टी20 विश्व कप के लिए क्वालीफाई कर लिया। “यह हमारे लिए बहुत गर्व का पल है। हम वर्षों से कोशिश कर रहे थे। पिछले तीन सालों में टीम ने बेहद मेहनत की है और भगवान की कृपा से इस बार हम सफल रहे,” जसप्रीत ने कहा।
उनके लिए भारत की यात्रा सिर्फ एक टूर्नामेंट नहीं, बल्कि जड़ों से दोबारा जुड़ने का अनुभव है। विश्व-स्तरीय क्रिकेट सुविधाओं और उन मैदानों पर खेलने का मौका, जिन्हें उन्होंने बचपन से देखा था।
“कपिल देव, सुनील गावस्कर, सचिन तेंदुलकर, धोनी और विराट कोहली जैसे दिग्गजों को जिन मैदानों पर खेलते देखा है, वहाँ खुद उतरना एक अद्भुत एहसास है,” उन्होंने कहा। चिदंबरम स्टेडियम में अभ्यास मैच हो, ईडन गार्डन्स की भव्यता या वानखेड़े का माहौल—जसप्रीत और उनकी टीम के लिए यह सब किसी सपने के सच होने जैसा है।



