‘करो या मरो’ क्वालीफायर के लिए तैयार भारतीय टीम, सविता को जीत का भरोसा
महिला हॉकी विश्व कप क्वालीफायर
अनुभवी गोलकीपर सविता पूनिया ने स्पष्ट किया है कि अगले महीने हैदराबाद में होने वाले महिला हॉकी विश्व कप क्वालीफायर भारतीय टीम के लिए ‘करो या मरो’ जैसा चुनौतीपूर्ण मुकाबला होगा।
फिर भी, इस बार टीम की तैयारी और माहौल उन्हें विश्वास दिलाता है कि कोच शोर्ड मारिन की अगुवाई में टीम जीत के साथ वर्ष की शुरुआत करेगी।
इस साल पद्मश्री सम्मान पाने वाली सविता ने एक न्यूज़ एजेंसी को बताया, “हमारी टीम पहले भी मजबूत थी और आज भी उतनी ही मजबूत है। हमें जो ट्रेनर और कोच चाहिए थे, वे हमें मिले और टीम का माहौल बेहद सकारात्मक है।”
तीन सौ से अधिक अंतरराष्ट्रीय मैच खेल चुकी गोलकीपर ने कहा, “पूरी टीम जानती है कि विश्व कप क्वालीफायर हमारे लिए निर्णायक है, लेकिन हमें भरोसा है कि हम अपनी हॉकी खेलकर इसे जीत सकते हैं।”

भारतीय टीम, जो अगस्त में एशिया कप के जरिये बेल्जियम और नीदरलैंड में होने वाले विश्व कप के लिए सीधे क्वालीफाई करने में असफल रही थी, अब हैदराबाद में 8 से 14 मार्च तक क्वालीफायर खेलेगी, जिसमें इंग्लैंड, स्कॉटलैंड, कोरिया, इटली, उरूग्वे, वेल्स और ऑस्ट्रिया जैसी टीमें शामिल हैं।
सविता ने आगे बताया कि क्वालीफिकेशन सिर्फ विश्व कप तक ही सीमित नहीं है। प्रो लीग में जगह बनाने के लिए नेशंस कप जीतना जरूरी है। उन्होंने कहा, “प्रो लीग से बाहर होना बड़ा झटका था, लेकिन अब नेशंस कप जीतकर हम विश्व की शीर्ष आठ टीमों के खिलाफ खेलने का अनुभव हासिल कर सकते हैं। यह अनुभव टीम के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।”
पूर्व कप्तान ने आगामी चुनौतियों पर भी रोशनी डाली। उन्होंने कहा, “इस साल विश्व कप और एशियाई खेल दोनों हैं। दोनों टूर्नामेंट्स के बीच बहुत कम समय है, इसलिए फिटनेस पर विशेष ध्यान देना होगा। एशियाई खेलों में हमने रजत और कांस्य पदक जीते हैं, लेकिन अब लक्ष्य स्वर्ण पदक और लॉस एंजिल्स ओलंपिक के लिए सीधे क्वालीफाई करना है।”
सविता ने चीन को एशियाई खेलों में मुख्य चुनौती बताया और कहा, “हमें अपनी ताकत पर फोकस करना है, न कि विरोधी टीम की। यही दृष्टिकोण हमें नेशंस कप जीतकर प्रो लीग में लाने में मदद कर चुका है, और आगे भी यही हमारा मंत्र होगा।”
टोक्यो ओलंपिक 2021 में चौथे स्थान हासिल करने वाली भारतीय महिला हॉकी टीम के पिछले साल के प्रदर्शन में गिरावट का कारण सविता के अनुसार फिटनेस का कम स्तर था।
उन्होंने कहा, “खेल में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। टोक्यो में अच्छे प्रदर्शन का मुख्य कारण हमारी फिटनेस थी। कोच शोर्ड, यानिके और वेन ने उस समय इस पर विशेष ध्यान दिया था। रियो 2016 में हम फिटनेस के कारण पिछड़ गए थे, लेकिन टोक्यो में हमने सुधार किया।
हालाँकि पिछले डेढ़ साल में फिर से फिटनेस का स्तर गिरा है।” सविता ने याद दिलाया कि रियो में 36 साल बाद ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने के बावजूद टीम ग्रुप चरण में बाहर हो गई थी, लेकिन टोक्यो में शोर्ड मारिन के मार्गदर्शन में टीम ने ऐतिहासिक चौथा स्थान हासिल किया।
उन्होंने कहा, “शोर्ड हमें प्रेरित करते हैं, सकारात्मक माहौल बनाते हैं और मैदान पर बहुत डिमांडिंग होते हैं। खिलाड़ी उनकी अपेक्षाओं को समझते हैं और जिम्मेदारी लेते हैं।” फिटनेस समस्याओं से उबरने और हॉकी इंडिया लीग के माध्यम से वापसी करने वाली सविता ने व्यक्तिगत संघर्ष भी साझा किया।
उन्होंने कहा, “2017 में मेरा करियर लगभग खत्म होने वाला था क्योंकि रियो ओलंपिक में प्रदर्शन अच्छा नहीं था।शोर्ड ने मुझे मौका दिया और वहीं से मैंने अपनी गोलकीपिंग का आनंद लेना शुरू किया। उनके भरोसे ने मेरे प्रदर्शन को नई ऊँचाइयाँ दी।”



