अराजकता, असुरक्षा और अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न का सामना कर रहा है बांग्लादेश: शेख हसीना

राघवेंद्र प्रताप सिंह: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा है कि बांग्लादेश अराजकता, असुरक्षा और अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न का सामना कर रहा है। पूरे देश में भीड़ की हिंसा और उग्रवाद की समस्या है। नई दिल्ली में कल शाम पत्रकार वार्ता के दौरान ऑडियो संदेश में शेख हसीना ने कहा कि वर्तमान समय में बांग्लादेश अपने इतिहास के सबसे खतरनाक दौर में है।
उन्होंने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के लिए लोकतंत्र बहाल करने, हिंसा और अराजकता समाप्त करने, और जन सेवाओं को सुचारू करने की मांग की। उन्होंने धार्मिक अल्पसंख्यकों, महिलाओं और समाज के कमजोर वर्ग की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा विपक्षी दलों को डराने-धमकाना बंद करने की मांग की। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र से पिछले वर्ष की घटनाओं की निष्पक्ष जांच कराने का भी आग्रह किया। उन्होंने बांग्लादेश के नागरिकों से लोकतंत्र बहाल करने के लिए जन समर्थन की अपील की।
इससे पूर्व बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस की नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार की कड़ी आलोचना की है। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अंतरिम सरकार पर 12 फरवरी को होने वाले आम चुनावों से पहले अवामी लीग को निलंबित करके लोकतांत्रिक मानदंडों को कमजोर करने का आरोप लगाया है।
द प्रिंट को दिए एक लिखित साक्षात्कार में हसीना ने कहा कि इस कदम से लाखों मतदाताओं को मताधिकार से वंचित किया गया है और चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता कमजोर हुई है। उन्होंने सरकार के इस दावे को खारिज कर दिया कि पार्टी को प्रतिबंधित नहीं केवल निलंबित किया गया है। उन्होंने तर्क दिया कि चुनाव प्रचार या चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित पार्टी वास्तव में राजनीतिक जीवन से बाहर हो जाती है।
शेख हसीना ने आरोप लगाया कि अंतरिम प्रशासन ने हार के डर से चुनावी मैदान खाली कर दिया, और जोर देकर कहा कि अवामी लीग के बिना होने वाले चुनाव स्वतंत्र, निष्पक्ष या वैध नहीं हो सकते। उन्होंने यूनुस की अंतरिम सरकार को गैर-निर्वाचित बताया। शेख हसीना ने कानूनी ढाँचे को तोड़-मरोड़ कर गैर-कानूनी कार्यों को वैध बनाने का आरोप भी यूनुस पर लगाया।



