CBI से समन मिलने के अगले ही दिन मैंने इस्तीफा दे दिया था… 130वें संशोधन विधेयक पर क्या बोले अमित शाह

130th Amendment Bill : 130वें संशोधन विधेयक पर बोल रहे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि अगर देश का प्रधानमंत्री जेल चला जाए, तो क्या आपको लगता है कि यह सही है कि प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री जेल से सरकार चलाएँ? क्या इस देश में ऐसी मान्यता है कि पद पर बैठे व्यक्ति के बिना देश नहीं चलेगा? आपकी पार्टी के पास बहुमत है, इसलिए आपकी पार्टी का कोई व्यक्ति आकर सरकार चलाएगा. जब आपको जमानत मिलती है, तो आपको वहाँ जाना ही चाहिए… हमें दो साल बाद (संसद की) सदस्यता क्यों खोनी चाहिए?…कांग्रेस के शासन में यह प्रावधान था कि अगर सत्र न्यायालय से दो साल से अधिक कारावास का आदेश होता है, तो आपकी सदस्यता स्वतः समाप्त हो जाती है…”
मुझे नैतिकता का पाठ किसने पढ़ाया
विपक्ष द्वारा उनकी नैतिकता और जेल में बिताए समय पर सवाल उठाए जाने पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि सीबीआई से समन मिलने के अगले ही दिन मैंने इस्तीफा दे दिया. बाद में मुझे गिरफ्तार कर लिया गया. मामला चलता रहा और फैसला आया कि यह राजनीतिक बदले का मामला है और मैं पूरी तरह निर्दोष हूं. वह फैसला बाद में आया, मुझे पहले ही जमानत मिल गई… तब भी मैंने शपथ नहीं ली और दोबारा गृह मंत्री नहीं बना. इतना ही नहीं, जब तक मेरे खिलाफ सभी आरोप पूरी तरह से खारिज नहीं हो गए, तब तक मैंने किसी भी संवैधानिक पद की शपथ नहीं ली. विपक्ष मुझे नैतिकता का कौन सा पाठ पढ़ा रहा है?…”
वो जेल से सरकार चलाना चाहते हैं
विपक्ष द्वारा उन पर लगाए जा रहे विभिन्न आरोपों पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि आज भी वे कोशिश कर रहे हैं कि अगर उन्हें कभी जेल जाना पड़ा, तो वे जेल से आसानी से सरकार बना लेंगे. जेल को ही सीएम हाउस, पीएम हाउस बना देंगे और डीजीपी, मुख्य सचिव, कैबिनेट सचिव या गृह सचिव जेल से आदेश लेंगे. मेरी पार्टी और मैं इस विचार को पूरी तरह से खारिज करते हैं कि इस देश को उस व्यक्ति के बिना नहीं चलाया जा सकता जो वहां बैठा है. इससे संसद या विधानसभा में किसी के बहुमत पर कोई असर नहीं पड़ेगा. एक सदस्य जाएगा, पार्टी के अन्य सदस्य सरकार चलाएंगे, और जब उन्हें जमानत मिल जाएगी, तो वे आकर फिर से शपथ ले सकते हैं. इसमें क्या आपत्ति है?…”
जेपीसी के बहिष्कार पर क्या बोले अमित शाह
130वें संशोधन विधेयक को जेपीसी को भेजने और विपक्ष द्वारा जेपीसी का बहिष्कार करने पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि उन्हें (विपक्ष को) कौन कह रहा है कि वे इसका (जेपीसी) हिस्सा न बनें? हम पहले से ही कह रहे हैं कि आपको इसका हिस्सा बनना चाहिए. यदि आप संसद को संचालित करने के लिए स्थापित नियमों को नहीं मानते हैं और कहते हैं कि हमारी इच्छा अंतिम होनी चाहिए, भले ही हम विपक्ष में हों, तो ऐसा नहीं हो सकता. सरकार उन्हें एक मौका दे सकती है. अगर वे मौका स्वीकार नहीं करते हैं, तो हम क्या कर सकते हैं? हम प्राप्त करने वाले छोर पर हैं. अगर वे जेपीसी बनाने का फैसला लेने के बाद भी जेपीसी का बहिष्कार करते हैं, तो सरकार के पास क्या विकल्प है?… जेपीसी में कई गवाहों को बुलाया जाता है, और सार्वजनिक जीवन के लोगों को भी बुलाया जाएगा. सभी तर्कों और सबूतों के आधार पर एक रिपोर्ट तैयार की जाती है, और उस रिपोर्ट के आधार पर विधेयक को बदल दिया जाता है…”



