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इलेक्ट्रिक व्हीकल सब्सिडी को मान्यता देने वाला देश का पहला राज्य बना उत्तर प्रदेश

राघवेंद्र प्रताप सिंह: उत्तर प्रदेश सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा निर्णय लेते हुए चार्जिंग स्टेशनों की अपस्ट्रीम इंस्टॉलेशन लागत (upstream installation costs) को अपनी ईवी सब्सिडी ढांचे के अंतर्गत शामिल कर लिया है। EV चार्जिंग स्टेशनों को लगाने के काम को बोझ न समझा जाए। इसलिए योगी सरकार ने ईवी सब्सिडी ढांचे को मंजूरी दी है।
यह निर्णय मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह की अध्यक्षता में आयोजित उच्च स्तरीय अधिकार प्राप्त इलेक्ट्रिक वाहन समिति (HLEEVC) की बैठक में लिया गया। राज्य सरकार के अनुसार, भारत में यह पहली बार है जब ₹10 लाख प्रति यूनिट तक की पूंजीगत सब्सिडी प्राप्त करने के लिए आवश्यक ‘पात्र अचल पूंजी निवेश’ (Fixed Capital Investment) में अपस्ट्रीम बुनियादी ढांचे की लागत को भी शामिल किया जाएगा। यह कदम सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों (PCS) की व्यवहार्यता और विस्तार को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। इन्वेस्ट यूपी (Invest UP) इस नीति को लागू करने वाली नोडल एजेंसी है।

उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रिक वाहन विनिर्माण और गतिशीलता नीति-2022 के तहत इस संशोधन से उन ‘चार्ज पॉइंट ऑपरेटर्स’ को राहत मिलेगी, जो अब तक ₹25 लाख के न्यूनतम निवेश की शर्त पूरी नहीं कर पा रहे थे। ऐसा इसलिए था क्योंकि पहले अपस्ट्रीम इंफ्रास्ट्रक्चर की लागत को कुल निवेश में नहीं गिना जाता था।

अब चार्जिंग स्टेशन लगाने के लिए बुनियादी ढांचा तैयार करने में आने वाली शुरुआती लागत पर भी सब्सिडी मिल सकेगी। प्रदेश सरकार पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास में तेजी ला रही है। शहरी परिवहन निदेशालय ने पिछले साल पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत प्रदेश के 16 प्रमुख शहरों में 320 पब्लिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की महत्वाकांक्षी योजना शुरू की है। प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या में तेजी से बढ़ रही है। वर्ष 2024 में 1,55,889 ईवी पंजीकरण के साथ उत्तर प्रदेश देश में सबसे अधिक ईवी उपयोग वाला राज्य बन गया है।

चार्जिंग स्टेशनों के लिए जमीन नगर निगम उपलब्ध कराएंगे और बिजली कनेक्शन में सहायता करेंगे। वे प्रति किलोवाट एक रुपये की राजस्व में हिस्सेदारी लेंगे। शहरी परिवहन निदेशालय नियमित निरीक्षण करेगा ताकि तकनीकी और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित हो। प्रदेश सरकार की इस पहल से न केवल पर्यावरण को लाभ होगा बल्कि रोजगार सृजन और आर्थिक समृद्धि को भी नई दिशा मिलेगी।

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