अंबेडकर के प्रति सम्मान और राजनीतिक संदेश देने की कवायद में बीजेपी, जानिए पीएम मोदी ने क्या कहा

बीएस राय: भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हिसार में आयोजित जनसभा में कांग्रेस पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने न केवल अंबेडकर के विचारों का अपमान किया, बल्कि उन्हें हमेशा व्यवस्था से बाहर रखने की साजिश भी की।
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में कहा, “हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि कांग्रेस ने बाबा साहेब के साथ क्या किया। जब तक वे जीवित रहे, कांग्रेस ने उनका अपमान किया। उन्हें दो बार चुनाव में हराया। कांग्रेस ने हमेशा उनके विचारों को दबाने की कोशिश की।” संविधान और वोट बैंक की राजनीति पर निशाना मोदी ने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी ने वोट बैंक की राजनीति के लिए देश के संविधान की आत्मा को कुचल दिया।
उन्होंने कहा, “बाबा साहेब समानता के पक्षधर थे, लेकिन कांग्रेस ने पूरे देश में वोट बैंक की राजनीति का वायरस फैला दिया। जब भी कांग्रेस को सत्ता का संकट आया, तो उन्होंने संविधान को कुचलने में कोई संकोच नहीं किया – चाहे वह आपातकाल का दौर हो या सत्ता बचाने का कोई और प्रयास।”
प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस द्वारा 2013 में किए गए वक्फ कानून संशोधन पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “कांग्रेस ने मुसलमानों को खुश करने के लिए वक्फ कानून में संशोधन किया, लेकिन इसका उद्देश्य समुदाय का भला करना नहीं, बल्कि केवल उनके वोट हासिल करना था। अगर वक्फ संपत्तियों का सही इस्तेमाल होता, तो मुस्लिम युवाओं को पंचर बनवाने की जरूरत नहीं पड़ती।”
कांग्रेस पर मुस्लिम समुदाय को महज वोट बैंक के तौर पर इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हुए मोदी ने कहा, “अगर कांग्रेस को मुसलमानों से इतना ही लगाव है, तो आज तक किसी मुस्लिम को पार्टी अध्यक्ष क्यों नहीं बनाया गया? क्या उनके 50% टिकट मुसलमानों को दिए गए?” उन्होंने आगे कहा कि नया वक्फ संशोधन कानून न सिर्फ मुस्लिम समुदाय बल्कि आदिवासियों के अधिकारों की भी रक्षा करेगा।
रैली के अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने बाबा साहेब अंबेडकर के योगदान को याद किया और उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा, “आज जब हम अंबेडकर जयंती मना रहे हैं, तो हमें उनके विचारों को न सिर्फ याद करने की जरूरत है, बल्कि उन्हें आत्मसात भी करना चाहिए।” प्रधानमंत्री मोदी का यह भाषण न सिर्फ अंबेडकर को श्रद्धांजलि थी, बल्कि आगामी चुनावी माहौल में कांग्रेस के खिलाफ एक रणनीतिक और तीखा राजनीतिक संदेश भी था।



