पश्चिम बंगाल में सरकार का यू-टर्न: CJP रैली के प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज ‘स्वत: संज्ञान’ (Suo Motu) FIR ली गई वापस

राघवेंद्र प्रताप सिंह
कोलकाता
पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था और नागरिक अधिकारों के मुद्दे पर राज्य सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच चल रहे टकराव में एक नया मोड़ आया है। राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन ने एक बड़ा कदम उठाते हुए ‘सिटिजंस फॉर जस्टिस एंड पीस’ (CJP) द्वारा आयोजित हालिया रैली में भाग लेने वाले प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस द्वारा स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेकर दर्ज की गई सभी प्राथमिकियों (FIRs) को आधिकारिक रूप से वापस ले लिया है। इसे मानवाधिकार संगठनों और नागरिक समाज की एक बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है।
गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले CJP और अन्य सामाजिक संगठनों ने राज्य में कुछ ज्वलंत स्थानीय मुद्दों और नागरिक अधिकारों की बहाली को लेकर एक विशाल रैली का आयोजन किया था। पुलिस का आरोप था कि रैली के दौरान प्रदर्शनकारियों ने तय रूट का उल्लंघन किया और यातायात बाधित कर शांति भंग करने का प्रयास किया, जिसके आधार पर पुलिस ने खुद ही (Suo motu) कई छात्र नेताओं और कार्यकर्ताओं पर आपराधिक मामले दर्ज कर लिए थे।
इस पुलिसिया कार्रवाई के बाद राज्य भर के बुद्धिजीवियों, मानवाधिकार वकीलों और विपक्षी दलों ने ममता सरकार पर ‘लोकतांत्रिक आवाज़ को दबाने’ का कड़ा आरोप लगाया था। लगातार बढ़ते राजनीतिक और सामाजिक दबाव को देखते हुए, राज्य के गृह विभाग (जिसका प्रभार स्वयं मुख्यमंत्री के पास है) ने मामलों की समीक्षा की और शांति बहाली के उद्देश्य से इन मुकदमों को निरस्त करने का आदेश जारी कर दिया। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि आगामी चुनावों और राज्य की छवि को ध्यान में रखते हुए सरकार किसी भी बड़े जनांदोलन को भड़कने से रोकना चाहती है।



